पेटीएम है…
अंजलि दिल्ली लौटते समय सब्जियाँ खरीदती है. छुट्टे पैसे न होने पर जब वह सामान लौटाने लगती है, सब्जी वाली अम्मा का सहज जवाब ‘पेटीएम है’ कहानी को एक दिलचस्प मोड़ देता है.

अंजलि दिल्ली लौटते समय सब्जियाँ खरीदती है. छुट्टे पैसे न होने पर जब वह सामान लौटाने लगती है, सब्जी वाली अम्मा का सहज जवाब ‘पेटीएम है’ कहानी को एक दिलचस्प मोड़ देता है.
होटल में बैठा एक परिवार तरह-तरह की रोटियों का ऑर्डर दे रहा था। तभी पिता बाहर मिली एक भूखी वृद्धा का ज़िक्र करते हैं, जो केवल एक सूखी रोटी की आस लगाए बैठी थी। यह सुनकर बेटा चुपचाप अपनी प्लेट से रोटियाँ लेकर बाहर चला जाता है। लौटते समय उसके शब्द सभी के दिल को छू लेते हैं रोटी का असली स्वाद उसकी किस्म में नहीं, बल्कि किसी भूखे का पेट भरने के बाद मिलने वाले सुकून में होता है।
‘सबक’ एक मार्मिक हिंदी लघुकथा है, जो यह बताती है कि संवेदना और कृतज्ञता केवल इंसानों की नहीं, पशुओं की भी पहचान होती है। गंगू चाची के स्नेह और सम्मान का ऋण चुकाने के लिए शेरू अन्याय का डटकर सामना करता है। यह कहानी केवल एक कुत्ते की वफ़ादारी नहीं, बल्कि महिला सम्मान, मानवीय संवेदनाओं और गलत के खिलाफ खड़े होने का सशक्त संदेश भी देती है। अंत में पाठक के मन में यही प्रश्न रह जाता है कि असली इंसानियत किसमें है इंसान में या उस बेजुबान में?
मधु मिश्रा हिंदी साहित्य जगत की एक संवेदनशील, सक्रिय और बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न रचनाकार हैं। उन्होंने कहानी, लघुकथा, कविता, हाइकु और आलेख के माध्यम से समाज, स्त्री संवेदना और रिश्तों के यथार्थ को प्रभावशाली स्वर दिया है। उनका लघुकथा संग्रह धूप के पाँव तथा कहानी संग्रह ड्रीम गर्ल विशेष रूप से चर्चित रहे हैं। वर्ष 2001 से निरंतर उनकी रचनाएँ अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित मधु मिश्रा आज नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।
‘बसा-बसाया घर’ एक ऐसी मार्मिक लघुकथा है, जिसमें बेटी अपने तलाक के फैसले पर अडिग रहती है। माता-पिता उसे समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बातचीत के दौरान वह उनके अतीत का ऐसा सच सामने रख देती है, जिससे दोनों निरुत्तर हो जाते हैं। कहानी रिश्तों में विश्वास, दोहरे मापदंड और आत्मसम्मान जैसे गंभीर विषयों को उजागर करती है। यह कथा बताती है कि दूसरों को सलाह देना आसान है, लेकिन जब सच सामने आता है तो अपने ही बनाए मूल्य टूट जाते हैं।
“उजाले की ओर” एक प्रतीकात्मक लघुकथा है, जिसमें अंधकार और प्रकाश के टकराव के जरिए समाज की छिपी बुराइयों को उजागर किया गया है। यह कहानी बताती है कि सच का प्रकाश जब फैलता है, तो अंधेरा टिक नहीं पाता।
‘ज्ञान का सागर’ एक प्रेरक हिंदी कहानी है, जिसमें कबाड़ी के काम से बने विशाल पुस्तकालय और ज्ञान के प्रति जुनून की मार्मिक कथा है।