रंगरेजन

अमलतास के सुनहरे फूलों से भरे जंगल में पीले घाघरे पहने रंगरेजन का जादुई और प्रकृतिमय दृश्य।

डॉ.किरण सरावगी

सुनहरे जंगल के किनारे एक छोटी-सी बस्ती थी। वहाँ एक रंगरेजन रहती थी कारीगर रंगरेजन। उसके हाथों में जैसे जादू था। वह फूलों, पत्तों और मिट्टी से ऐसे रंग बनाती कि कपड़े जीवित लगने लगते।

एक वर्ष गर्मियों में जंगल अमलतास के पीले फूलों से भर गया। पेड़ों से झरते फूल ऐसे लगते मानो धरती पर सोने की बारिश हो रही हो। कारीगर रंगरेजन ने उन फूलों को देखकर एक अद्भुत घाघरा रंगा। घाघरे का रंग बिल्कुल अमलतास जैसा था—चमकीला, सुनहरा और खुशियों से भरा।

जब वह घाघरा पहनकर जंगल से गुज़री, तो एक विचित्र घटना हुई।

हवा रुक गई।
पत्तियाँ थम गईं।

और अमलतास के फूल उसके चारों ओर घुँघरुओं की तरह बजने लगे। हवा में नवगीत तैरने लगे। आसपास के प्रेमी युगल उस उन्माद में जैसे अमलतास की तरह झूम रहे थे। सबकी झोली में मानो अमलतास के बीज समा गए हों।

रंगरेजन मुस्कुराई। उसने कहा

“जंगल का रंग पीला नहीं, हरा नहीं, सुनहरा नहीं। जंगल का असली रंग प्रेम है।”

इतना सुनते ही अमलतास के फूल चमक उठे। पूरा जंगल सुनहरी रोशनी में नहा गया। फूलों की वर्षा होने लगी। उस वर्षा में कई रंगों के बीज थे।

रंगरेजन ने वे बीज पूरे गाँव में बाँट दिए। जल्द ही हर घर रंगों और खुशियों से भर गया।

तब से लोग कहते हैं कि जब भी अमलतास के फूल झरते हैं और सुनहरी हवा बहती है, तो कहीं न कहीं कारीगर रंगरेजन अपना जादुई घाघरा पहन जंगल के रास्तों पर घूम रही होती है और दुनिया में नए रंग बो रही होती है।

प्रकृति के सभी रंग अनमोल हैं।
आओ, एक बीज हम भी इस धरती में बो दें।
इन रचनाओं को भी पढ़िए और अपनी राय जरुर व्यक्त करें

तेरे मेरे दरमियां…
रंगरेजन
स्मृति और… तुम !
गोदना
करवटें बदलते रहे, सारी रात हम…
दीद उसकी

5 thoughts on “रंगरेजन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *