“नारी की गरिमा”

नारी सम्मान और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक एक आत्मविश्वासी भारतीय महिला

प्रीति अरोरा, बदायूं (उत्तरप्रदेश)

क्यों पैरों में जंजीर
सिर्फ स्त्री के होती है?
बाँध क्यों नहीं देते बेटों को,
जिनकी हैवानियत भी शाही होती है?

पूछती हूँ, क्यों अबलाएँ सिमट गई हैं
सिर्फ न्याय के हवालों में?
सड़क पर जला क्यों नहीं देते
निर्भया-सा कांड करने वालों को?

सिर्फ बैनरों पर नारे लिख देने से
न्याय की संगति नहीं होगी।
यदि आज भी नारी एक प्रश्नचिह्न है,
तो उसकी गरिमा की यह सबसे बड़ी विसंगति होगी।

दोषहीन होकर भी
शर्म से तार-तार है,
क्या स्त्री होना ही
उसका सबसे बड़ा विकार है?

नहीं खटखटाती मैं न्याय के द्वार,
जिस प्रतिमा पर आज भी काली पट्टी बँधी है।
न्याय और दया की गुहार लगाती,
जहाँ आज भी एक बेसहारा माँ खड़ी है।

जिस देश में बेटी की आबरू नीलाम है,
चंद रुपयों की खातिर स्त्री खड़ी बाज़ार है।
बिक रही है जहाँ प्रतिष्ठा वेश्यालयों में,
झूठा पूजन है देवी का वहाँ देवालयों में।

शर्म आती है मुझे समाज के ठेकेदारों पर,
जो स्वयं ही बिक चुके हैं।
क्या बचाएँगे वे मर्यादा,
जो टिके हैं छल की दीवारों पर।

लेखिका के बारे में-


प्रीति अरोरा
बदायूं, उत्तर प्रदेश

प्रीति अरोरा हिंदी साहित्य जगत की एक बेबाक, संवेदनशील एवं सृजनशील लेखिका हैं, जिन्होंने अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से साहित्यिक क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई है। साहित्य सृजन के प्रति समर्पित प्रीति जी वर्तमान में अनेक प्रतिष्ठित ऑनलाइन साहित्यिक मंचों से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं तथा अपनी रचनात्मक अभिव्यक्तियों से पाठकों के हृदय को निरंतर स्पर्श कर रही हैं। उनकी रचनाओं को विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं, जैसे ‘रसिक मंजरी’, ‘नया सवेरा’, ‘नव उदय’ एवं ‘मेरी निहारिका’ में विशेष स्थान प्राप्त हुआ है।
इसके अतिरिक्त उनकी लेखनी को अनेक साहित्यिक संस्थाओं एवं मंचों द्वारा सम्मानित प्रमाण-पत्रों और प्रशस्तियों से अलंकृत किया जा चुका है।देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों ‘अमर उजाला’, ‘हिंदुस्तान’, ‘अमर प्रभात’ आदि में उनकी रचनाओं का प्रकाशन उनके साहित्यिक योगदान का प्रमाण है।
दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र “सारा सच” द्वारा आयोजित रचना प्रतियोगिता में उनकी विजय उनके रचनात्मक कौशल और साहित्यिक प्रतिभा की उल्लेखनीय उपलब्धि है। प्रीति अरोरा की रचनाएँ दो साझा काव्य संकलनों “मेरी कलम से” एवं “काव्य कलश” में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही, उन्हें आकाशवाणी रामपुर से परिवार दिवस के अवसर पर अपनी रचना की रिकॉर्डिंग का गौरवपूर्ण अवसर भी प्राप्त हुआ।


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