तेरे मेरे दरमियां…

बारिश भरी शाम में दूर खड़े दो भारतीय प्रेमी, उनके बीच धुंध और भावनात्मक दूरी, मोहब्बत और इंतजार का सिनेमाई दृश्य।

कंचनमाला ‘अमर'(उर्मी)

तेरे मेरे दरमियां ये दूरी कैसी,
फ़ासलों की ये बदगुमानी कैसी।

दिल यूं तो शाद है तेरे आने से देखो,
फिर भी मिरे दिल में ये इक ख़लिश कैसी।

हालात ये मज़बूर तेरे भी हैं मेरे भी,
फिर भी विसाल की ये आरज़ू कैसी ।

बनाई दरमियां दूरी जानकर हमने,
फिर भी क़रीब आने की ये मुतनाक़िज़ कैसी।

मना लिया है दिल को तो मैनें अपने ,
फिर भी रुखसारों पर लरज़ती ये बूँदें कैसी ।
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