36 शख्स… 36 कहानियां
एक बूढ़ा डाक बंगला अपनी आंखों से देखे कस्बे के बदलते समय, लोगों, रिश्तों और भूली-बिसरी यादों की खट्टी-मीठी कहानियां सुनाता है. पढ़िए 36 शख्स… 36 कहानियां.

एक बूढ़ा डाक बंगला अपनी आंखों से देखे कस्बे के बदलते समय, लोगों, रिश्तों और भूली-बिसरी यादों की खट्टी-मीठी कहानियां सुनाता है. पढ़िए 36 शख्स… 36 कहानियां.
गिरकर, टूटकर और बिखरकर भी जो फिर खड़ी हो जाए, वही असली कहानी है। “मैं एक कहानी हूँ” आत्मसम्मान, संघर्ष, हौसले और अपनी पहचान खुद बनाने की जिद को शब्द देती एक प्रेरणादायक कविता है।
उम्र के साथ बदलती जिंदगी, ढलती जवानी, कमजोर पड़ती ताकत और वक्त के बदलते रंगों की सच्चाई को बयां करती यह भावपूर्ण कविता इंसान को अपने आज पर घमंड न करने और दूसरों को खुश रखने का संदेश देती है.
ब्रेडक्रंबिंग आधुनिक रिश्तों का ऐसा व्यवहार है, जिसमें कोई व्यक्ति बीच-बीच में प्यार, ध्यान और रोमांटिक संकेत देकर उम्मीद बनाए रखता है, लेकिन रिश्ते को स्पष्ट दिशा या प्रतिबद्धता नहीं देता. जानिए इसकी पहचान, मनोवैज्ञानिक प्रभाव और इससे बाहर निकलने के तरीके.
महिदपुर रोड के श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने धर्मसभा में लोभ को सबसे खतरनाक कषाय बताते हुए कहा कि लोभ व्यक्ति को दुर्गति, विनाश और पतन की ओर ले जाता है. इस अवसर पर 51 से अधिक सिद्धितप तपस्वियों की तपस्या जारी है और 20 अगस्त से नवकार महामंत्र आराधना का शुभारंभ होगा.
सन् 1976 का रामगढ़ गांव, अम्मां का स्नेह, मिट्टी की खुशबू, लालटेन की रोशनी, चूड़ियों की छन-छन, दशहरे का मेला और बचपन की बेफिक्र दुनिया. यह संस्मरण उस समय की याद दिलाता है जब गांव सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि रिश्तों, संस्कारों और अपनापन से भरी पूरी दुनिया हुआ करता था.
महिदपुर रोड में भगवान नेमिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ. गिरनार तीर्थ की प्रतिकृति, शक्रस्तव अष्टोत्तरी महाभिषेक, 14 महास्वप्नों की प्रस्तुति और भक्ति नृत्य ने आयोजन को विशेष बना दिया.
यह कविता पिता की स्मृतियों और उनके वात्सल्य को समर्पित एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। गुलमोहर की घनी छाँव और बचपन का घर कवयित्री के लिए पिता के स्नेह, सुरक्षा और अपनत्व का प्रतीक बन जाते हैं। पिता के दिए लाड़-दुलार, हर चिंता को समझने और कठिन समय में साथ देने की यादें आज भी उनके मन में जीवित हैं। पिता के जाने के बाद उनकी कमी और भी गहराई से महसूस होती है। कविता में बेटी अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है और मन में एक बार फिर उनकी गोद में सिर रखने की भावुक इच्छा प्रकट करती है।
जब भीतर का रोष शब्दों में उबलने लगे और कलम ही अभिव्यक्ति का आखिरी हथियार रह जाए, तब कविता जन्म लेती है. ‘एक दिन यूं ही’ इसी बेचैनी और आक्रोश की मार्मिक अभिव्यक्ति है.