संघर्ष से सफलता तक: मंच पर गूंजी नारी शक्ति
महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एन डी स्टूडियो कर्जत में भव्य समारोह आयोजित हुआ, जिसमें ‘विरासत’ पत्रिका का विमोचन और महिला सशक्तिकरण पर चर्चा हुई

महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एन डी स्टूडियो कर्जत में भव्य समारोह आयोजित हुआ, जिसमें ‘विरासत’ पत्रिका का विमोचन और महिला सशक्तिकरण पर चर्चा हुई
स्त्री शक्ति संगठन द्वारा महिला दिवस के अवसर पर ऑनलाइन विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और समाज निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
यह कविता विश्व में फैलती हिंसा, नकली व्यवहार और टूटते मानवीय मूल्यों पर तीखा प्रश्न उठाती है। होली और रमज़ान जैसे पावन अवसरों के बीच खून-खराबे की विडंबना को उजागर करती एक मार्मिक सामाजिक रचना।
विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद रंग ज़िंदगी को खूबसूरत बनाते हैं।जीवन में हर रंग अपनी अहमियत दर्ज कराने समय-समय पर चला आता है। अमूमन हम नीले, पीले, हरे और सबसे पुराने रंगगुलाबी के बारे में जानते हैं। रंग ज़िंदगी में हों या शब्दों में… वे खुद को बयां कर ही देते हैं। आइए जानते हैं,…
सरपंच ऋतु पाटीदार और उनके प्रतिनिधि सत्यनारायण पाटीदार के नेतृत्व में शिवाजीनगर में विकास कार्यों को नई दिशा मिली है। पारदर्शिता, जनसुनवाई और प्रभावी कार्यशैली के कारण पंचायत की कार्यप्रणाली मजबूत हुई है।
“कलई करा लो…” की पुकार के साथ शुरू होती थी बचपन की हलचल। पीतल के बर्तनों की चमक, भट्टी की आँच और राँगे की खुशबू के बीच छिपी थीं मासूम खुशियाँ। यह संस्मरण केवल कलई की प्रक्रिया का वर्णन नहीं, बल्कि उस दौर की सादगी, पारिवारिक आत्मीयता और छोटी-छोटी बातों में मिलने वाली अपार खुशी की झलक है। आज की चकाचौंध भरी दुनिया में वे दिन याद बनकर मन को भिगो जाते हैं।
आजकल रिश्ते घरों में कम और मोबाइल स्क्रीन पर ज़्यादा दिखाई देते हैं। दोस्त, नाते-रिश्तेदार और पड़ोसी सब डिजिटल दुनिया में सक्रिय हैं, जबकि वास्तविक जीवन में दूरी बढ़ती जा रही है। यह व्यंग्यात्मक लेख सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप विश्वविद्यालय और आभासी संबंधों के माध्यम से आधुनिक समाज की विडंबना को उजागर करता है। लेख यह प्रश्न उठाता है कि क्या वाकई डिजिटल दुनिया उतनी ही रोचक है जितनी दिखती है?
जयपुर में राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी एवं सम्पर्क संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “ब्रज रसिया – होली के रंग… कृष्णा के संग” कार्यक्रम में ब्रज संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। चार घंटे तक चले इस आयोजन में राधा-कृष्ण प्रस्तुति, फाग गीत, नृत्य और काव्य प्रतियोगिताओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को ब्रज भाषा और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना रहा।
होली भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख रंगोत्सव है, जो फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। होलिका-दहन असत्य और अहंकार के अंत का संदेश देता है, जबकि रंगों की होली आपसी आत्मीयता को मजबूत करती है। यह पर्व हमें जीवन के विविध रंगों को स्वीकार कर प्रेम और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।