
विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद
रंग ज़िंदगी को खूबसूरत बनाते हैं।
जीवन में हर रंग अपनी अहमियत दर्ज कराने समय-समय पर चला आता है। अमूमन हम नीले, पीले, हरे और सबसे पुराने रंगगुलाबी के बारे में जानते हैं।
रंग ज़िंदगी में हों या शब्दों में… वे खुद को बयां कर ही देते हैं। आइए जानते हैं, कैसे-
एक रंग ज़िम्मेदारी का… दुनियादारी के संग।
एक रंग मासूमियत का… चुहल के संग।
एक रंग मिलन का… विरह के संग।
एक रंग सफलता का… नाकामी के संग।
एक रंग दीवानगी का… दीदार के संग।
एक रंग बेरुखी का… यादों के संग।
एक रंग विवादों का… वादों के संग।
एक रंग प्यार का… ऐतबार के संग।
एक रंग चाहत का… बगावत के संग।
एक रंग आहत का… बनावट के संग।
एक रंग मुक्ति का… भक्ति के संग।
एक रंग संस्कृति का… संस्कारों के संग।
एक रंग त्योहारों का… होली के संग।
हमें इस दुनिया में इन्हीं रंगों के साथ रहना है। तभी तो किसी ने क्या खूब कहा-
रंगों से भरा ये सफर यूँ ही बरकरार रहने दे,
थोड़ा खुद को बेकरार और मुझे तेरा तलबगार रहने दे।

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