
सुनीता सोलंकी मीना, प्रसिद्ध लेखिका
विश्व खेल रहा खूनी होली,
पाक माह रमज़ान!
काम सभी का कब्ज़ा करना,
जाए कितनी जान।
जोगीरा सा रा रा रा रा…
कोई इंसान ज़िंदगी को
कर देते बदरंग,
कोई जीने का ढंग छीन
खुशियाँ करते भंग।
जोगीरा सा रा रा रा रा…
ऊँची-ऊँची बना इमारत,
देते पल में फोड़,
बारूद के ढेर पर हम बैठे,
मौत खड़ी हर मोड़।
जोगीरा सा रा रा रा रा रा…
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कैसे खेलें, क्या ही खेलें
होली का त्योहार?
सबकी सबसे दुश्मनी यहाँ,
नकली हर व्यवहार।
जोगीरा सा रा रा रा रा…

खूनी होली से खुश होने वालों का अन्जाम भी वैसा ही करुण होता है । इससे मरने वाले दुबारा नहीं आ सकते । मानव सभ्यता हज़ारों साल बीतने के बाद भी सभ्य नहीं हो पाई।
यह सच ही सच सामयिक विवरण है ,
लिखने के लिए हिम्मत करने के लिए बधाई।
खूनी होली से खुश होने वालों का अन्जाम भी वैसा ही करुण होता है । इससे मरने वाले दुबारा नहीं आ सकते । मानव सभ्यता हज़ारों साल बीतने के बाद भी सभ्य नहीं हो पाई।
यह सच ही सच सामयिक विवरण है ,
लिखने के लिए हिम्मत करने के लिए बधाई।
बहुत अच्छी लेखनी