
मौसमी चंद्रा, पटना
वक्त का पहिया घूमकर वापस लौटता है,
पर वे लोग कहाँ लौटते हैं
जो उसके साथ छूट गए थे।
पुराने आँगन फिर दिख जाते हैं,
मगर दहलीज़ पर बैठी प्रतीक्षाएँ
किसी और के नाम हो जाती हैं।
कुछ रास्ते दुबारा मिलते ज़रूर हैं,
पर उन रास्तों पर बीता हुआ जीवन
कभी दुबारा नहीं घटता।
वक्त का पहिया घूमकर वापस लौटता है,
और हमें याद दिलाता है कि
बदलता केवल समय नहीं,
समय के भीतर हम भी बदल चुके होते हैं।
