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परीक्षा केंद्र के बाहर सुरक्षा जांच से गुजरते भारतीय विद्यार्थी, जिनके चेहरों पर चिंता, उम्मीद और आत्मसम्मान के भाव दिखाई दे रहे हैं।

सपनों पर चलती लाठियाँ

यह कविता उन विद्यार्थियों की पीड़ा और संघर्ष को स्वर देती है, जो सपनों और उम्मीदों का बोझ लेकर शिक्षा के मंदिरों तक पहुँचते हैं, लेकिन कई बार सम्मान के बजाय संदेह और कठोरता का सामना करते हैं। कविता शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन और संवेदनशील संवाद के बीच संतुलन की आवश्यकता पर गहरा प्रश्न उठाती है।

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ऐ वक्त कुछ पल ठहर जा…

ऐ वक्त, ज़रा ठहर तो सही। सदियों से मन में पलते प्रश्न तेरी तेज़ रफ़्तार के कारण अनकहे रह जाते हैं। मैं पूछना चाहती हूँ—कहाँ खो गई वह दुनिया, जहाँ हरियाली और खुशहाली थी, जहाँ पशु-पक्षियों तक में प्रेम और उल्लास था। सूरज की किरणों में वात्सल्य झलकता था, चाँदनी में प्रीत का अहसास बिखरा रहता था।

आज सब कुछ बदल गया है। इंसान इंसान का दुश्मन बन बैठा है, भावनाएँ सूख गई हैं, हमदर्दी लुप्त हो गई है और खुदगर्जी ही राज कर रही है। न मौसम ठीक है, न प्रकृति। हरियाली मिट रही है, खुशहाली खो रही है। इंसानियत बिन मौत ही मर रही है।

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कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा नागपुर की मेघा अग्रवाल और उनकी पुत्री मिहूं अग्रवाल को कल्प भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित करते हुए

एक मंच, दो पीढ़ियाँ और साहित्य की साझा विरासत

नागपुर की साहित्यकार मेघा अग्रवाल और उनकी पुत्री मिहूं अग्रवाल को कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा एक साथ सम्मानित किया गया। “दो पीढ़ियाँ एक साथ” कार्यक्रम में माँ-पुत्री की यह साहित्यिक यात्रा दर्शकों के लिए प्रेरणा बनी।

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धुंधले सांध्य वातावरण में एक भारतीय महिला अकेली खड़ी है। उसके पास दलदल में खिला एक कमल दिखाई दे रहा है, जो देह और आत्मा के संघर्ष का प्रतीक है। पृष्ठभूमि में चट्टानें, बहता जल और धुंध आत्मबोध, तन्हाई और अस्तित्व की गहन यात्रा को दर्शा रहे हैं।

प्राण प्रतिष्ठा

प्राण प्रतिष्ठा” एक गहन प्रतीकात्मक कविता है, जिसमें देह, आत्मा, यथार्थ और तन्हाई के बीच संघर्ष को सशक्त बिंबों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। यह रचना मनुष्य के अस्तित्व, आत्मबोध और भीतर सुलगती मौन पीड़ा की मार्मिक पड़ताल करती है।

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चाय की ख़ुशबू और यादों की परतें

चाय की ख़ुशबू संग जब यादों की परतें खुलती हैं,
तो ज़िंदगी में खोया-पाया सब सामने आ खड़ा होता है।दिल अक्सर सोचता है — काश! जो चाहा था, वही मिल जाता… या ज़िंदगी एक और मौका देती।”

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रात में अपनी सोती हुई बेटी को देखते हुए चिंतन में डूबी महिला आईपीएस अधिकारी

ज़िम्मेदारियां अपनी-अपनी

एक सफल आईपीएस अधिकारी की ज़िंदगी का वह मोड़, जहाँ कर्तव्य, मातृत्व, परिवार और भविष्य की चिंता आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। यह संवेदनशील कहानी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और माता-पिता के कठिन निर्णयों पर गहरा प्रश्न उठाती है।

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जाते हुए साल को सलाम

जाते हुए साल को सलाम कहते हुए दिसंबर धीरे-धीरे विदा लेता है। कुछ रिश्ते साथ रह जाते हैं, कुछ यादों की किताब में दर्ज हो जाते हैं। समय की इस यात्रा में कुछ सपने पूरे होते हैं, कुछ अधूरे रह जाते हैं और उम्र चुपचाप अपने हिस्से का हिसाब घटाती चलती है। बूढ़ा दिसंबर खट्टी-मीठी स्मृतियाँ सौंपकर जाता है, ताकि जनवरी नई उम्मीदों की रोशनी बिखेर सके

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प्रेरणादायक कहानियां | अनसुने हीरो |

अनसुने हीरो को पहचान दिलाने की पहल

हम डिजिटल मीडिया की ताकत का उपयोग करते हुए प्रेरणादायक व्यक्तियों, संस्थाओं और विचारों की कहानियों को दुनिया तक पहुंचाते हैं. हमारा उद्देश्य केवल कहानियां साझा करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की एक नई लहर शुरू करना है.

हम विशेष रूप से उन अनसुने हीरो को सामने लाना चाहते हैं, जो बिना किसी पहचान या प्रचार के जमीनी स्तर पर लगातार काम कर रहे हैं. ये वही लोग हैं जिन्हें मुख्यधारा की मीडिया अक्सर नजरअंदाज कर देती है, लेकिन असल बदलाव की नींव यही रखते हैं.

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टूटते ख्वाबों की ग़ज़ल

गहन भावनाओं और रात के सन्नाटे के माध्यम से जीवन की नाजुकताओं और बेचैनियों को बयान करती है। लेखक की नींद में खलल डालने वाली घटनाओं के माध्यम से यह व्यक्त किया गया है कि किस तरह अचानक आने वाली परिस्थितियाँ हमारी मानसिक शांति और हौसलों पर असर डालती हैं। रात भर दिल और चाँद दोनों रोते हैं, जो मानवीय संवेदनाओं का मिश्रण प्रस्तुत करता है। “इत्र सी सुगंध” और “तितलियों के पंखों पर रंग” जैसी छवियाँ जीवन की सुंदरता और नाजुकता को दर्शाती हैं, 

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उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल महालोक में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें, सावन की तैयारियां और शीघ्र दर्शन व्यवस्था का यथार्थवादी दृश्य।

शीघ्र दर्शन से दो माह में महाकाल को 24.24 करोड़

श्री महाकालेश्वर मंदिर में 250 रुपये की शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मई-जून में 24 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई है। सावन-भादौ में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए महाकाल महालोक में 11 करोड़ रुपये की लागत से शेड, नई कतार व्यवस्था, क्यूआर आधारित बैरियर्स और ऑनलाइन अन्नदान सुविधा जैसी व्यवस्थाएं शुरू की जा रही हैं।

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