आज लगेगा साल का अंतिम चंद्र ग्रहण
भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर आज साल का अंतिम खग्रास चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना भारत समेत विश्व के कई हिस्सों में दिखाई देगी। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट 2 सेकंड होगी।

भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर आज साल का अंतिम खग्रास चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना भारत समेत विश्व के कई हिस्सों में दिखाई देगी। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट 2 सेकंड होगी।
“एकांत का शोर” एक मार्मिक कहानी है जो पिता के निधन के बाद माँ के जीवन में पसरे अकेलेपन और बेटे की व्यस्तता के बीच बढ़ती भावनात्मक दूरी को चित्रित करती है। जब बेटा अपनी माँ को आधी रात अपनी तस्वीर को सीने से लगाकर लोरी सुनाते हुए देखता है, तब उसे एहसास होता है कि सफलता की दौड़ में उसने सबसे अनमोल रिश्ते को अनदेखा कर दिया है।
“मैं कलम हूँ” एक प्रेरणादायक कविता है जो कलम की शक्ति, सच्चाई और अभिव्यक्ति के महत्व को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि शब्दों में दुनिया बदलने की ताकत होती है।
बरसों बीत जाने पर भी किसी एक रिश्ते का कसैलापन आपके मन के किसी अंधेरे कोने में अपनी जगह बना कर समय/ असमय आपके मन को कड़वाहट से भर देता है।
महिदपुर रोड पर आयोजित रामलीला में हनुमान जी की झांकी सबसे रोमांचकारी थी. केले और फलों से लदे पेड़ों को छलाँग लगाकर तोड़ते, अशोक वाटिका उजाड़ते, और कभी-कभी फल दर्शकों की ओर उछालते। दर्शक इसे श्रद्धा से हनुमान जी का प्रसाद मान लेते थे।
10वीं पास होने के बावजूद खुद को इसरो वैज्ञानिक बताकर मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर एक महिला से 26 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को येरवडा पुलिस ने गिरफ्तार किया है. उसने इसी प्रकार से महिलाओं से ठगी के 11 मामले किए हैं.
आदर्श प्रशांत म्हात्रे उर्फ स्वप्नील वारुळे उर्फ हेमंत गायकर उर्फ जयेश पाटिल (उम्र 34, निवासी अलीबाग, जिला रायगढ़) ऐसा इस आरोपी का नाम है. उसे कैसीनो का शौक है और वह गोवा के एक कैसीनो का गोल्ड कार्ड सदस्य है. ठगी के 21 लाख रुपये उसने इसी कैसीनो के खाते में जमा किए थे. येरवडा पुलिस ने यह 21 लाख रुपये जब्त कर लिए हैं.
“अरे काकी, तुम्हें नहीं मालूम क्या? बंसी का बेटा कलेक्टर बन गया है…” संध्या की बात सुनते ही जानकी काकी की आँखों में चमक आ गई। दिन-रात ऑटो चलाकर बेटे को पढ़ाने वाले बंसी की तपस्या आज रंग लाई थी। जब मीडिया ने बेटे से उसकी सफलता का श्रेय पूछा, तो उसने बिना झिझक कहा—“मेरे बाउजी… क्योंकि फल की पहचान हमेशा पेड़ से ही होती है।” यह सुनकर बंसी की आँखों से आँसू बह निकले, और आसपास खड़ी भीड़ तालियों से गूंज उठी। यह सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस संघर्ष, त्याग और प्रेम का प्रमाण है, जो एक पिता अपने बच्चे के लिए जीता है।
डॉ प्रेरणा मनाना, पूर्व निदेशक आरडी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, लेखिका स्तंभकार इंदौर- भारतीय संत परंपरा के महानतम व्यक्तित्वों में से एक, संत महामंडलेश्वर अभिराम दास जी त्यागी, बुधवार को हमारे निवास स्थान पधारे। उनके आगमन से पूरा वातावरण दिव्यता, शांतिपूर्ण ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया। संत श्री अभिराम दास जी त्यागी न केवल एक…
सिर्फ़ शादी होना सर्टिफिकेट नहीं होता, माँ!” — अनीता की ये बात एक सशक्त सामाजिक सवाल खड़ा करती है: क्या एक स्त्री की स्वतंत्रता और निर्णय का मापदंड सिर्फ विवाह होना चाहिए?