Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

कविता और कहानी

कभी शब्द कविता का रूप लेकर बहती है, तो कभी कहानी का रूप धरकर जीवन की झलकियाँ दिखाती है। कविता भावनाओं की नदी है — कभी आँसू की बूँदों सी, तो कभी मुस्कान की किरणों सी। हर पंक्ति में कोई सपना छुपा होता है, हर बिंब में कोई अनकहा एहसास।वहीं कहानी जीवन की लहर है — उतार-चढ़ाव से भरी हुई। पात्रों के माध्यम से समय और परिस्थितियाँ आकार लेती हैं। कभी यह तूफान की तरह सबकुछ झकझोर देती है, तो कभी सुबह की पहली रोशनी की तरह उम्मीद जगाती है।
कविता मन की भाषा है, आत्मा की धड़कन है। कहानी अनुभव की अभिव्यक्ति है, जीवन का दर्पण है। कविता विचारों का सूरज है, और कहानी अनुभूति की चाँदनी। कविता दिल को सुकून देती है, जबकि कहानी दिशा और सीख देती है।

Read More
अपने छोटे बच्चे का हाथ थामे मुस्कुराते हुए एक पिता, जो सुरक्षा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।

पापा

पिता सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं, बल्कि वह साया हैं जो हर मुश्किल में अपने बच्चों के साथ खड़ा रहता है। पढ़िए पिता के प्रेम, त्याग और निस्वार्थ समर्पण को समर्पित यह मार्मिक कविता।

Read More

चांदी ने रचा नया इतिहास, कीमत 2 लाख 6 हजार पार

सोने-चांदी के बाजार में बुधवार को ऐसा तूफान आया कि इतिहास के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए. चांदी ने पहली बार 2 लाख रुपये का आंकड़ा पार करते हुए 2 लाख 6 हजार रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बना लिया. एक ही दिन में चांदी की कीमत में 9,500 रुपये की जबरदस्त उछाल दर्ज की गई. वहीं सोना भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर मजबूती से टिका हुआ है. 24 कैरेट सोना 1 लाख 36 हजार 500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है.

Read More
स्कूल के दिनों के मासूम प्यार और बचपन की यादों पर आधारित भावनात्मक हिंदी कहानी

वो टिफ़िन,अचार और तुम….

हर प्रेम कहानी का अंत मिलन नहीं होता। कुछ प्रेम कहानियाँ केवल यादों में जीवित रहती हैं। अनिरुद्ध और काव्या की यह भावनात्मक कहानी बचपन की मासूम दोस्ती, अनकहे प्रेम और उन मीठी स्मृतियों को सहेजती है, जो उम्रभर दिल में मुस्कुराती रहती हैं।

Read More

फूलों की माला, हवा का राग”

“हर्षित धरा, हर्षित अंबर, कोहरे की विदाई, भौंरे और तितलियों की मुस्कान। दहकते पलाश, हरे-हरे परिधान, पीली सरसों की सजती दुकान। गेहूँ और चने की झूमती बाली, कोयल की मतवाली कूक। अमलतास की झूलती डालियाँ, फूलों की माला लिए प्रीत खड़ी है द्वार पर—सारी धरती बसंत से प्यार में डूबी हुई।”

Read More
भगवान गणेश की पीड़ा

भगवान गणेश की पीड़ा

ग्यारह दिनों तक मेरे भक्त मेरे दर्शन को तरसते रहे और मैं उनके प्रेम से अभिभूत था। परंतु विसर्जन के दिन जब बारह घंटों तक जल में खड़ा रहा, तब मैंने सच्चाई देखी।
मंडपों में लोग धक्का-मुक्की कर रहे थे, बहसबाजी कर रहे थे, आगे बढ़ने के लिए एक-दूसरे को गिरा रहे थे। सेवक भी अपना रोब दिखा रहे थे।
मैंने सोचा—पंडाल में नहीं तो क्यों न खुले आसमान और समुद्र की लहरों के बीच सबको समान रूप से दर्शन दूँ। वहाँ न कोई कतार, न कोई वीआईपी, न कोई भेदभाव। लेकिन… मेरे भक्तों ने वहीं भी मुझे याद दिला दिया कि इंसान ने भगवान को भी अपने बनाए हुए अमीर-गरीब और ऊँच-नीच के नियमों में बाँध दिया है।

मैं तो वही एकदंत गजानन हूँ—चाहे लालबाग में विराजमान रहूँ या किसी छोटे पंडाल में, या फिर गिरगांव चौपाटी की लहरों में।मेरे लिए सिर्फ एक ही चीज़ महत्वपूर्ण है—मन से की गई भक्ति। बाकी सब इंसानी दिखावा है।”**

Read More

व्यथा वृक्ष की…

कविता वृक्ष की पीड़ा और धैर्य का जीवंत चित्र खींचती है। गहरी जड़ों वाला यह वृक्ष कई अत्याचार और आघात सहकर भी खड़ा है। उसका कोमल तन और मन भले ही पत्ते-पत्ते, रेशा-रेशा झर गया हो, पर वह पूरी तरह टूटा नहीं। जर्जर होने के बाद भी वह आशा से भरा है कि उसकी शाखाओं पर फिर से नवकोपलें फूटेंगी, हरा-भरा जीवन लौटेगा।
वह स्वयं से प्रश्न करता है कि आखिर उसने क्या ग़लत किया था—सबको आसरा देकर, फल-फूल देकर, उदर-तृप्ति कराकर भी क्यों आहत होना पड़ा? पर साथ ही उसमें यह अटूट विश्वास है कि उसका अस्तित्व ही धरती के जीवन का आधार है। वह मनुष्यों को स्मरण कराता है—यदि वे उसे पोषित करेंगे तो बदले में वह उन्हें संरक्षण देगा।

Read More
सांझ के समय सुनसान रास्ते पर खड़ा एक अकेला व्यक्ति, बिछड़ते प्रेम और यादों के दर्द को दर्शाता हुआ दृश्य

तुम खो गए हो

यह ग़ज़ल एक ऐसे प्रेम की कहानी कहती है, जो साथ चलते-चलते कहीं खो गया। इसमें यादों की टीस, अधूरी मुलाकातें और इश्क़ की सच्चाई को बेहद मार्मिक तरीके से व्यक्त किया गया है। हर पंक्ति दिल के किसी कोने को छू जाती है और पाठक को अपने अनुभवों से जोड़ देती है।

Read More

बंगलौर में मिथिला महोत्सव:

“बंगलौर की धरती पर मिथिला समाज ने पहली बार संगठित होकर अपनी सांस्कृतिक शक्ति का एहसास कराया। पान, माछ, मखान के स्वाद और धरती से जुड़ने की परंपरा ने यह साबित कर दिया कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही पहचान बचती है।”

Read More

मान वाणी हिंदी

“हिंदी अब केवल देश तक सीमित नहीं रही, विदेशों में भी उसका मान बढ़ा है। लोग हिंदी सुनते, समझते और अभिवादन में भी अपनाते हैं। फिर भी हमारे ही शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों को यह सिखाया जाता है कि विकास अंग्रेज़ी से होगा, जबकि हिंदी बोलने पर मानो कोई अपराध कर दिया गया हो। यही हमारी सबसे बड़ी त्रासदी है।”

Read More