
डॉ प्रेरणा मनाना, पूर्व निदेशक आरडी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, लेखिका स्तंभकार
इंदौर- भारतीय संत परंपरा के महानतम व्यक्तित्वों में से एक, संत महामंडलेश्वर अभिराम दास जी त्यागी, बुधवार को हमारे निवास स्थान पधारे। उनके आगमन से पूरा वातावरण दिव्यता, शांतिपूर्ण ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया।
संत श्री अभिराम दास जी त्यागी न केवल एक दिव्य संत और आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा और करुणा का संदेश पहुँचाने वाले लोक-परमार्थी महापुरुष भी हैं। उनका जीवन त्याग, साधना और मानव सेवा के आदर्शों से परिपूर्ण है।
संत जी के आगमन से घर का प्रत्येक कोना मानो प्रकाशित हो उठा। उनके चरण पड़ते ही वातावरण स्वतः पवित्र और सात्त्विक हो गया। संत श्री की उपस्थिति में मन और हृदय दोनों ही अभिभूत हो उठे। श्रद्धालुओं की आँखों से अश्रुधारा बह निकली—जो किसी वेदना की नहीं, बल्कि आत्मिक आनंद और कृतज्ञता की थी।
संत महामंडलेश्वर अभिराम दास जी त्यागी ने स्पष्ट किया कि सच्ची भक्ति वही है जो सेवा में बदल जाए। उनका मानना है कि संत भाव के भूखे होते हैं, आडंबर के नहीं। वे अपने सरल और निष्कपट व्यवहार से प्रत्येक उपस्थित व्यक्ति के अंतःकरण को गहराई से स्पर्श करते हैं।
उनके प्रवचन और आशीर्वचन जन-मानस को सत्य, सदाचार और मानव मूल्यों के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। संत श्री के आगमन ने जीवन को नई दिशा दी, घर को पवित्रता का केंद्र बना दिया और उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए यह अनुभव जीवन की अमूल्य धरोहर बन गया।
संतों की संगति और उपस्थिति से स्पष्ट होता है कि उनका प्रभाव केवल बाहरी वातावरण तक सीमित नहीं रहता; यह व्यक्ति के मन, विचार और भावनाओं को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। जैसा कि गोस्वामी तुलसीदास और संत कबीर ने अपने ग्रंथों में उल्लेख किया है. साधु की संगति से अज्ञान, पाप और दुःख दूर हो जाते हैं और व्यक्ति ईश्वर प्राप्ति की दिशा में अग्रसर होता है।
इस दिव्य अवसर ने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के जीवन में श्रद्धा, भक्ति और विश्वास की एक नई चेतना जगाई। यह अनुभव केवल एक समारोह या आगमन नहीं था, बल्कि एक आत्मिक जागरण का क्षण था, जिसने उपस्थित सभी लोगों को सेवा, प्रेम और सकारात्मकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
