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मुंबई के सांताक्रुज में निर्मला फाउंडेशन के कवि सम्मेलन में मंच पर उपस्थित कवि और अतिथि

मुंबई में सजी साहित्य की महफिल

मुंबई के सांताक्रुज में निर्मला फाउंडेशन द्वारा आयोजित भव्य कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह में साहित्यकारों, कलाकारों और समाजसेवियों का सम्मान किया गया।

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लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के दौरान बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल को सम्मानित करते हुए अतिथि

नागपुर की बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल सम्मानित

लखनऊ में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में नागपुर की बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक प्रतिभा के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया।

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एक उदास रात में हल्की बारिश के बीच पीली स्ट्रीट लाइट के नीचे खड़ा एक अकेला व्यक्ति, गीली सड़क पर रोशनी की परछाईं और दूर धुंध में जाती हुई एक स्त्री की आकृति, यादों और जुदाई का भावपूर्ण दृश्य।

इश्क़, इंतज़ार और तन्हाई

यह ग़ज़ल यादों की उस नरम आहट को पकड़ती है, जो कभी चुपचाप दिल में उतर जाती है और फिर उम्रभर साथ रहती है। इसमें मोहब्बत के वो पल हैं, जो पूरे होकर भी अधूरे रह जाते हैं. नज़रों का झुकना, लबों का काँपना और मिलने से ज़्यादा बिछड़ने की कसक। हर शेर में एक ऐसी तन्हाई है, जो सिर्फ महसूस की जा सकती है, बयान करना आसान नहीं।

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घर की देहरी पर अकेले बैठे एक बुज़ुर्ग व्यक्ति, जो भावनात्मक अकेलेपन और सहारे की तलाश को दर्शाता है

बुज़ुर्गों की चुप्पी

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में, जहाँ हर कोई अपनी व्यस्तताओं में उलझा है, वहीं घर के बुज़ुर्ग धीरे-धीरे अकेले होते जा रहे हैं। जिन लोगों ने कभी हमें संभाला, वही आज अपने ही घर में सहारे और संवाद की तलाश करते दिखाई देते हैं। समस्या बुज़ुर्गों में नहीं, बल्कि बदलती हमारी संवेदनाओं में है। हमें यह समझना होगा कि उन्हें दया नहीं, बल्कि अपनापन, सम्मान और साथ चाहिए—क्योंकि आज वे जिस जगह हैं, कल हम भी वहीं होंगे।

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चाँदनी रात में हवा में लहराते लंबे बालों वाली महिला, जिसके आसपास भावनात्मक और रहस्यमयी माहौल है

जुल्फ़ तेरी

तेरी जुल्फ़ों की खुशबू और उनकी नरम छाँव में जैसे मैं खुद को भूलता चला गया। तेरी मौजूदगी में ऐसा सुकून मिला, मानो पूरी कायनात सिमटकर एक एहसास बन गई हो। लेकिन उसी चाँदनी रात में, जब भावनाएँ शब्दों में ढल रही थीं, कुछ ऐसा हुआ कि सारी इबारतें जलकर राख हो गईं। अब बस एक खामोशी, कुछ अधूरे जज़्बात और एक अनकहा सवाल रह गया है, जो आज भी दिल के किसी कोने से मुझे चुपचाप देखता है।

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सूर्यास्त के समय प्रकृति के बीच खड़ा एक जोड़ा, जो खामोशी में गहरे प्रेम और जुड़ाव को महसूस कर रहा है

प्रेम और चाहत

चाहत अक्सर एक इच्छा से जन्म लेती है—किसी को पाने, उसे अपने करीब रखने और उसके साथ अपने सपनों को पूरा करने की चाह। इसलिए समय, परिस्थितियों और मनःस्थिति के बदलने के साथ चाहत भी बदल सकती है। जब उम्मीदें पूरी नहीं होतीं या हालात साथ नहीं देते, तो चाहत का रंग फीका पड़ने लगता है।

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गांव के खेतों और कच्चे रास्ते के बीच खड़ा एक व्यक्ति, जो बचपन की यादों में खोया हुआ है

गांव की माटी की वो खुशबू

शहर की भीड़ और ऊँची इमारतों के बीच खड़े होकर भी मन बार-बार उसी गांव की ओर लौट जाता है, जहाँ माटी की खुशबू, माँ के हाथों की गरमाहट और रिश्तों की सच्चाई आज भी दिल में ज़िंदा है।

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शांत प्राकृतिक वातावरण में झील किनारे बैठी एक युवती, जो गहरे विचारों में डूबी हुई आत्म-चिंतन कर रही है

गहराइयों में छिपी सच्चाई

डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई जीवन की सच्चाई अक्सर सतह पर नहीं, उसकी गहराइयों में छिपी होती है। इसे समझने के लिए हमें कभी-कभी ठहरकर अपने भीतर झांकना पड़ता है। मेरे जीवन में भी एक ऐसा ही अनुभव आया, जिसने मुझे जीवन की गहराई से परिचित कराया। यह उन दिनों की बात है जब सब कुछ…

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