तेरे होने, मेरे न होने के बीच
कुछ रिश्ते नाम से नहीं, एहसासों से जिए जाते हैं। यह कविता प्रेम, स्मृतियों, आगोश और उस अनकहे खालीपन की कहानी है, जहाँ “तेरे अलावा” और “तेरे बिना” एक साथ सांस लेते हैं।

कुछ रिश्ते नाम से नहीं, एहसासों से जिए जाते हैं। यह कविता प्रेम, स्मृतियों, आगोश और उस अनकहे खालीपन की कहानी है, जहाँ “तेरे अलावा” और “तेरे बिना” एक साथ सांस लेते हैं।
‘शायद माँ आई है’ एक ऐसी भावनात्मक कविता है जिसमें माँ सीधे दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी आदतें, सहेजने का ढंग और प्रेम घर के हर कोने में महसूस होता है। यह कविता मातृत्व की उस अनकही उपस्थिति को शब्द देती है जो हमेशा साथ रहती है।
यह कविता उस स्त्री की आवाज़ है जो समाज की परिभाषाओं से परे अपनी पहचान खुद गढ़ना चाहती है। संघर्ष, आत्मविश्वास और स्वाभिमान से भरी यह रचना स्त्री-अस्तित्व की सशक्त अभिव्यक्ति है।
क़तर में अकेली ज़िंदगी जी रही मान्या परिवार की जिम्मेदारियों के बीच खुद को भूल चुकी थी। तन्हाई, पुराने प्रेम की स्मृतियाँ और नए रिश्ते के डर के बीच जब जीवन ने उसे प्रेम का दूसरा अवसर दिया, तब उसे समझ आया कि चलते रहने का नाम ही ज़िंदगी है।
उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने मंदिरों की बढ़ती आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एमबीए टैंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू किया है। ग्रेजुएट विद्यार्थी इस दो वर्षीय कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उज्जैन में गंगा दशहरा उत्सव के दौरान जूना अखाड़े ने अधिकमास के कारण पेशवाई और नीलगंगा सरोवर में होने वाले स्नान कार्यक्रम स्थगित कर दिए। हालांकि संतों ने मां शिप्रा और चिंतामन गणेश का विधिवत पूजन किया। अब केवल मां गंगा की आरती आयोजित की जाएगी।