
डॉ. तारा गुप्ता, प्रसिद्ध लेखिका, गाजियाबाद
नशा सुबह चढा ही था वो शाम तक उतर गया
न जाने कैसा प्रेम था चला नहीं, ठहर गया.
उसे भी तो तलाश थी मुझे भी कुछ तलाश थी
वो सामने खड़ा तो था न जाने फिर किधर गया.
बची न फिर तलब कोई बची न बेकरारियां
यूं फालतू से पर मेरे इक पल में ही कुतर गया.
पता नहीं किधर गया इधर गया _उधर गया
फकीर था बड़ा कोई जो मन मेरा संवर गया.
मिली नई झलक कोई , जो आज तक लुभा रही
अजीब शख्स था ,मगर वो रूह में पसर गया.

वाह ❤️
रेनू जी आपका दिल से धन्यवाद
आदरणीय साथियों मुझे इस बात की खुशी है कि आप सभी लोग एक-दूसरे की रचनाओं को पढ़ते हैं और अपनी राय व्यक्त करते हैं. इसी तरह से वरिष्ठ साथी, नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहें और समय-समय पर मार्गदर्शन करते रहें. आप अपनी रचनाएं नियमित रूप से भेज कर सहयोग करते रहें.
सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज
कहीं दिल से शुक्रिया आप सभी का
दिल से शुक्रिया आप सभी का /
मित्रों हिंदी साहित्य की सेवा के अनेकों प्रारूप हैं
उसमें से एक प्रारूप यह भी है कि साहित्यकारों को आभासी दुनिया में प्रकाशित करना /
मुझे प्रकाशित करने के लिए इस वेबसाइट का आभार व्यक्त करती हूं /
डॉक्टर तारा गुप्ता
गाजियाबाद
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सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज