विदेश में वतन की याद
विदेश की ठंडी हवाओं में भी दिल अपने वतन की खुशबू खोजता रहता है। यह कविता परदेस में रहकर भारत और अपनों की यादों को महसूस करने वाले हर भारतीय की भावनाओं को शब्द देती है।

विदेश की ठंडी हवाओं में भी दिल अपने वतन की खुशबू खोजता रहता है। यह कविता परदेस में रहकर भारत और अपनों की यादों को महसूस करने वाले हर भारतीय की भावनाओं को शब्द देती है।
यह कविता किसान को धरती का श्रेष्ठ कवि मानते हुए उसकी मेहनत, त्याग और अन्न उत्पादन को जीवन एवं सृजन का आधार बताती है।
यह भावपूर्ण कविता उन अनकहे लफ़्ज़ों की कहानी कहती है, जो मन में ठहर तो जाते हैं, लेकिन सही समय और अभिव्यक्ति न मिलने पर अंतस की गहराइयों में कहीं खो जाते हैं।
माँ के प्रेम, त्याग और अनकही भावनाओं को व्यक्त करती यह भावपूर्ण कविता हमें याद दिलाती है कि माँ सिर्फ हमारी देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि अपने सपनों और भावनाओं वाली एक संवेदनशील इंसान भी है।
“मैं परछाईं माँ की” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें माँ के संघर्ष, संस्कार, प्रेम और आशीर्वाद को बेटी की भावनाओं के माध्यम से खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।
यह कविता माँ की ममता, उसके संघर्ष, त्याग और बच्चों के लिए उसके अथाह प्रेम को बेहद भावुक और सुंदर शब्दों में प्रस्तुत करती है।
यह कविता माँ के साथ बिताए गए उन अनमोल पलों की स्मृतियों को सजीव करती है, जहाँ ममता, त्याग, अनुशासन और प्रेम की खुशबू हर शब्द में महसूस होती है।
विजया डालमिया, हैदराबाद वो हमारा दीवानापन थाया बचपन की मोहब्बत,जिसे दोस्ती का नाम देकरकरते थे हर पल शरारत। बड़े होने पर भीसब कुछ याद है मुझे…. छोटी-छोटी ज़िद, छोटी-छोटी तकरार,देती थी लंबी-सी खुशी।वो तपती धूप मेंएकटक उसके घर की ओर ताकते रहना,उसकी एक झलक पाने के लिए। पैरों में पड़े फफोलों को देखकरउसका मुझे डाँटना,और…