प्रतीक्षा में साँसे खड़ी…

चांदनी रात में अकेली बैठी महिला, किसी के इंतजार में खोई हुई, भावनात्मक और विरह का दृश्य

मधु झुनझुनवाला अमृता, जयपुर

नैन लिए नीर लड़ी, बीत रही धीर घड़ी,
प्रतीक्षा में साँसे खड़ी, थाम लेना मीत रे।

घिर आया निशा काल, चन्दा ने बदली चाल,
तिमिर का बिछा जाल, रहूँ न अभीत रे।

पीर लगी है घुलने,दीप लगे हैं बुझने,
देर कर दी तुमने, मंद पड़ी प्रीत रे।

नहीं ढ़लती यामिनी, भोर गाये न रागिनी,
मौन अमृता दामिनी, खोया है संगीत रे।

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