
मंजूलता, नोएडा
नीर भरे नयनों से यूँ न देखा करो,
अश्कों को ऐसे न बहाया करो।।
जीवन में अनेकों दुःख आते रहते हैं,
उन्हें हँसते-हँसते ही झेला करो।।
दर्द दूसरों का कुछ कम तो नहीं,
आगे बढ़ो और दुःखों को हर लिया करो।।
सृष्टि परिवर्तन से भरी पड़ी है,
सहती है धरा, देखकर कुछ सीखा करो।।
दुःख-सुख के चक्र को
चलना ही है,
हौसले को हरदम बनाए रखा करो।।
कायनात की घटनाओं
पर हमारा ज़ोर नहीं,
दिल को ये फ़लसफ़ा
समझाया करो।।
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Nice