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आत्मविश्वास और साहस के साथ आगे बढ़ती आधुनिक भारतीय लड़कियाँ

ये आजकल की लड़कियाँ

‘ये आजकल की लड़कियाँ’ एक ऐसी कविता है, जो पुरानी और नई पीढ़ी की सोच के अंतर को सामने लाती है। यह कविता आज की लड़कियों के आत्मविश्वास, साहस और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता को स्वर देती है। अब लड़कियाँ चुपचाप सब कुछ सहने के बजाय सही और गलत के बीच फर्क करना जानती हैं। वे बराबरी का हक माँगती ही नहीं, बल्कि अपने दम पर हासिल भी करती हैं। यह कविता बदलते दौर की उस नारी शक्ति को समर्पित है, जो किसी की सोच या बंदिशों से नहीं डरती और अपने सपनों के साथ आसमान छूने का हौसला रखती है।

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राष्ट्रीय कवि संगम नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी में उपस्थित साहित्यकार

राष्ट्रीय कवि संगम, नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी संपन्न

राष्ट्रीय कवि संगम, नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी 9 अक्टूबर को केंद्रीय विहार, सीवुड्स में आयोजित हुई। डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद गांई की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में साहित्यकारों ने काव्य पाठ कर राष्ट्र जागरण में कलमकारों की भूमिका पर जोर दिया।

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सूखी धरती पर उगता एक छोटा हरा अंकुर, जीवन और संवेदनाओं की नमी का प्रतीक

थोड़ी सी नमी बाकी रहने दो

जब मन से संवेदनाएँ सूखने लगें और जीवन से प्रेम, करुणा तथा ममता कम होने लगे, तब थोड़ी-सी नमी बचाए रखना जरूरी हो जाता है। यह कविता इंसानियत और प्रकृति के अस्तित्व को बचाने के लिए मन में संवेदनाओं की नमी बनाए रखने का संदेश देती है।

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कथक नृत्यांगना के पैरों में बँधे घुँघरू

घुँघरू

घुँघरुओं की झंकार केवल नृत्य का संगीत नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, विरह और मन के अनगिनत भावों की अभिव्यक्ति भी है। प्रस्तुत कविता में घुँघरुओं की इसी भावपूर्ण दुनिया को शब्दों में पिरोया गया है।

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वर्तमान की गुफ्तगू हिंदी कविता में चुप्पी, विरोध और बेहतर भविष्य की तलाश का प्रतीकात्मक दृश्य

वर्तमान की गुफ्तगू

जब हालात असहनीय होने लगते हैं, तब बोलना और सवाल करना जरूरी हो जाता है। ‘वर्तमान की गुफ्तगू’ चुप्पी, विरोध और संवाद के बीच बेहतर भविष्य की तलाश करती एक संवेदनशील हिंदी कविता है।

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अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और मानवता का संदेश देती हिंदी कविता बोलो बोलो कुछ तो बोलो

बोलो कुछ तो बोलो

अनुपमा भार्गव बोलो बोलो, कुछ तो बोलो,अंतर्मन की आँखें खोलो।छाया है चहुँ ओर अँधेरा,चुप रहने से वो और गहरा हो जाएगा।सुख का सूरज न निकलेगा,दुःख गहरा होकर बढ़ जाएगा। इस धरती माँ पर सबका हक है,पशु-पक्षी और अमीर-गरीब।कुछ ने सब कुछ दबा लिया हैऔर कुछ हैं शोषित, पीड़ित।साथ सदा दो निर्बल का,खुद को सत्कर्मों से…

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टूटते भरोसे और जीवन के सफर को दर्शाती भावुक हिंदी कविता

चलो छोड़ो भी…

हर अपना हमेशा अपना नहीं रहता और हर सफर मंज़िल तक नहीं पहुँचता। ‘चलो छोड़ो भी…’ कविता टूटते भरोसे, बदलते रिश्तों और जीवन में समय के साथ आगे बढ़ने की बात कहती है।

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सरकारी नौकरी मांगते मदन के सामने बैठे नेता जी, राजनीतिक व्यंग्य लघुकथा ‘डिग्री’ का दृश्य

अगर मुड़ के देखे, जो तू मुझको एक बार…

कभी कोई लौटकर सिर्फ एक बार मुड़कर देख ले, तो बरसों की रंजिशें मिट सकती हैं। यह कविता प्रेम, इंतज़ार, विरह और बीते पलों की उन यादों को स्वर देती है, जो आज भी दिल में जीवित हैं।

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बापू तेरे देश में सामाजिक विसंगतियों पर आधारित हिंदी कविता का भावपूर्ण दृश्य

बापू तेरे देश में…

‘बापू तेरे देश में’ कविता बदलते सामाजिक परिवेश की तस्वीर सामने रखते हुए सत्य, मानवीयता, पर्यावरण और सामाजिक व्यवहार जैसे विषयों पर गंभीर सवाल उठाती है।

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मेरे हिस्से की पीड़ाएँ हिंदी कविता के भावों को दर्शाता संघर्ष और आत्मबल का दृश्य

मेरे हिस्से की पीड़ाएँ 

मेरे हिस्से की पीड़ाएँ मुझे स्वीकार हैं, क्योंकि संघर्ष से घबराना मेरी प्रकृति नहीं। प्रेम, त्याग और आत्मबल से भरी यह कविता जीवन के हर रण में स्वयं पर विश्वास रखने की बात करती है।

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