gulmohar
कथक नृत्यांगना के पैरों में बँधे घुँघरू

घुँघरू

घुँघरुओं की झंकार केवल नृत्य का संगीत नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, विरह और मन के अनगिनत भावों की अभिव्यक्ति भी है। प्रस्तुत कविता में घुँघरुओं की इसी भावपूर्ण दुनिया को शब्दों में पिरोया गया है।

Read More
वर्तमान की गुफ्तगू हिंदी कविता में चुप्पी, विरोध और बेहतर भविष्य की तलाश का प्रतीकात्मक दृश्य

वर्तमान की गुफ्तगू

जब हालात असहनीय होने लगते हैं, तब बोलना और सवाल करना जरूरी हो जाता है। ‘वर्तमान की गुफ्तगू’ चुप्पी, विरोध और संवाद के बीच बेहतर भविष्य की तलाश करती एक संवेदनशील हिंदी कविता है।

Read More
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और मानवता का संदेश देती हिंदी कविता बोलो बोलो कुछ तो बोलो

बोलो कुछ तो बोलो

अनुपमा भार्गव बोलो बोलो, कुछ तो बोलो,अंतर्मन की आँखें खोलो।छाया है चहुँ ओर अँधेरा,चुप रहने से वो और गहरा हो जाएगा।सुख का सूरज न निकलेगा,दुःख गहरा होकर बढ़ जाएगा। इस धरती माँ पर सबका हक है,पशु-पक्षी और अमीर-गरीब।कुछ ने सब कुछ दबा लिया हैऔर कुछ हैं शोषित, पीड़ित।साथ सदा दो निर्बल का,खुद को सत्कर्मों से…

Read More
टूटते भरोसे और जीवन के सफर को दर्शाती भावुक हिंदी कविता

चलो छोड़ो भी…

हर अपना हमेशा अपना नहीं रहता और हर सफर मंज़िल तक नहीं पहुँचता। ‘चलो छोड़ो भी…’ कविता टूटते भरोसे, बदलते रिश्तों और जीवन में समय के साथ आगे बढ़ने की बात कहती है।

Read More
सरकारी नौकरी मांगते मदन के सामने बैठे नेता जी, राजनीतिक व्यंग्य लघुकथा ‘डिग्री’ का दृश्य

अगर मुड़ के देखे, जो तू मुझको एक बार…

कभी कोई लौटकर सिर्फ एक बार मुड़कर देख ले, तो बरसों की रंजिशें मिट सकती हैं। यह कविता प्रेम, इंतज़ार, विरह और बीते पलों की उन यादों को स्वर देती है, जो आज भी दिल में जीवित हैं।

Read More
बापू तेरे देश में सामाजिक विसंगतियों पर आधारित हिंदी कविता का भावपूर्ण दृश्य

बापू तेरे देश में…

‘बापू तेरे देश में’ कविता बदलते सामाजिक परिवेश की तस्वीर सामने रखते हुए सत्य, मानवीयता, पर्यावरण और सामाजिक व्यवहार जैसे विषयों पर गंभीर सवाल उठाती है।

Read More
मेरे हिस्से की पीड़ाएँ हिंदी कविता के भावों को दर्शाता संघर्ष और आत्मबल का दृश्य

मेरे हिस्से की पीड़ाएँ 

मेरे हिस्से की पीड़ाएँ मुझे स्वीकार हैं, क्योंकि संघर्ष से घबराना मेरी प्रकृति नहीं। प्रेम, त्याग और आत्मबल से भरी यह कविता जीवन के हर रण में स्वयं पर विश्वास रखने की बात करती है।

Read More
वह कौन हिंदी कविता के भावों को दर्शाता रहस्यमय दृश्य

वह कौन ?

कभी कोई हमारी स्मृतियों में दीपक बनकर जलता है, कभी साँसों में ताप बनकर ठहरता है। ‘वह कौन?’ ऐसी ही अनाम उपस्थिति, प्रेम, विरह और स्मृति की तलाश करती संवेदनशील कविता है।

Read More
विपरीत हवाओं में उड़ते फूल का प्रतीकात्मक दृश्य

विपरीत हवाओं में उड़ना

विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ना आसान नहीं होता। यह कविता संघर्ष, परिवर्तन, प्रेम और असंभव लगने वाली परिस्थितियों के बीच उम्मीद की तलाश को अभिव्यक्त करती है।

Read More
अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और सामाजिक चेतना को दर्शाती हिंदी कविता

अन्याय का समर

अन्याय के सामने मौन रहने के बजाय जागने और अपने कर्तव्यों को पहचानने का आह्वान करती यह कविता मानवता, न्याय और सामाजिक चेतना की आवाज़ बनकर सामने आती है।

Read More