हिंदी कविता
सपने सिसक रहे हैं
‘सपने सिसक रहे हैं’ एक ऐसी भावपूर्ण कविता है, जो कठिन समय, टूटते सपनों और भीतर बची उम्मीद की लौ को शब्द देती है। यह कविता याद दिलाती है कि अँधेरी रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, हर अस्त के बाद एक नया सवेरा अवश्य आता है।
जीवन-सौंदर्य
आले में रखी नीली शीशी, हवा से हिलता अख़बार, तुलसी पर ठहरी ओस, बारिश की स्मृतियाँ और समय का अविराम प्रवाह यह कविता बताती है कि जीवन का वास्तविक सौंदर्य बड़े क्षणों में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की साधारण दिखने वाली अनुभूतियों में छिपा होता है।
संग-संग चलें
धूप हो या वर्षा, सुख हो या दुःख सच्चा प्रेम हर परिस्थिति में साथ निभाने का नाम है। यह कविता जीवन और मृत्यु के शाश्वत सत्य के बीच अटूट विश्वास, समर्पण और साथ रहने के वचन को बेहद मार्मिक ढंग से व्यक्त करती है।
लकड़ी का सम्मेलन
लकड़ी का सम्मेलन’ एक सशक्त समकालीन हिंदी कविता है, जिसमें सभ्यता, पर्यावरण और मनुष्य के पाखंड पर तीखा व्यंग्य किया गया है। कविता बताती है कि पेड़ों की रक्षा के भाषण अक्सर उन्हीं लकड़ियों के बीच दिए जाते हैं, जिनकी देह कभी जंगल हुआ करती थी।
युद्ध की अरगनी टटोलता स्त्री का प्रेम
युद्ध की भयावहता के बीच एक स्त्री का मन प्रेम, विश्वास और शांति का स्वप्न संजोए रहता है। यह कविता हिंसा के विरुद्ध मानवीय करुणा, सोलह शृंगार की कोमलता और एक नए उजास भरे युग की आकांक्षा को बेहद संवेदनशील ढंग से व्यक्त करती है।
