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संग-संग चलें

एक छाते के नीचे बारिश में साथ चलते प्रेमी युगल का भावनात्मक दृश्य, प्रेम और समर्पण पर आधारित हिंदी कविता।

शबनम मेहरोत्रा, कानपुर

धूप-वर्षा में संग-संग चलें,
एक छाते के दोनों तले।
हम न बिछड़ेंगे दोनों कभी,
मौत आती है, आए भले।

ज़िंदगी को मौत से ये इकरार है,
संग जाने से मुझको कब इंकार है।
मौत के साए में ही तो
हर एक जीवन मानो पले।
हम न बिछड़ेंगे दोनों कभी,
मौत आती है, आए भले।

सबसे मिलना-बिछड़ना है निश्चित,
मौत आएगी, यह तो है सुनिश्चित।
तब तक जी लें खुशी से, शबनम,
जब तक मौत ये टले।
हम न बिछड़ेंगे दोनों कभी,
मौत आती है, आए भले।

धूप-वर्षा में संग-संग चलें,
एक छाते के दोनों तले।

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