अनकहा प्रेम
कुछ रिश्तों को नाम की ज़रूरत नहीं होती। वे विश्वास, अपनापन और खामोशियों की भाषा में जीते हैं। राघव और रिद्धिमा की यह कहानी ऐसे ही एक अनकहे प्रेम की दास्तान है, जहाँ शब्दों से अधिक भरोसा बोलता है।

कुछ रिश्तों को नाम की ज़रूरत नहीं होती। वे विश्वास, अपनापन और खामोशियों की भाषा में जीते हैं। राघव और रिद्धिमा की यह कहानी ऐसे ही एक अनकहे प्रेम की दास्तान है, जहाँ शब्दों से अधिक भरोसा बोलता है।
युवा दिल बहुत नाज़ुक होता है. छोटी-सी बात भी उसे खुशी से भर सकती है और उतनी ही जल्दी आहत भी कर सकती है. अक्सर आकर्षण को ही प्रेम समझ लिया जाता है, क्योंकि किसी की मुस्कान, बात करने का अंदाज़ या स्टाइल दिल को छू जाता है. लेकिन सच्चा प्रेम इससे कहीं आगे होता है. वह व्यक्ति के विचारों, उसके व्यवहार और उसके साथ बिताए गए सच्चे पलों से धीरे-धीरे गहराता है.
यह कविता प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प को दर्शाती है। भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों में रची यह रचना स्त्री के समर्पण, स्नेह और भावनात्मक सुरक्षा की आकांक्षा को कोमल शब्दों में व्यक्त करती है।