सूर्यास्त के समय बालकनी में साथ बैठे एक युवा पुरुष और महिला, जो विश्वास और सुकून से भरे रिश्ते का प्रतीक हैं।

अनकहा प्रेम

कुछ रिश्तों को नाम की ज़रूरत नहीं होती। वे विश्वास, अपनापन और खामोशियों की भाषा में जीते हैं। राघव और रिद्धिमा की यह कहानी ऐसे ही एक अनकहे प्रेम की दास्तान है, जहाँ शब्दों से अधिक भरोसा बोलता है।

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एक आधुनिक शहर के कैफे में बैठे युवक और युवती, दोनों अपने फोन में व्यस्त हैं, पास होते हुए भी उनके चेहरे पर भावनात्मक दूरी और सोच में डूबे होने का एहसास झलक रहा है।

यंगस्टर का प्रेम

युवा दिल बहुत नाज़ुक होता है. छोटी-सी बात भी उसे खुशी से भर सकती है और उतनी ही जल्दी आहत भी कर सकती है. अक्सर आकर्षण को ही प्रेम समझ लिया जाता है, क्योंकि किसी की मुस्कान, बात करने का अंदाज़ या स्टाइल दिल को छू जाता है. लेकिन सच्चा प्रेम इससे कहीं आगे होता है. वह व्यक्ति के विचारों, उसके व्यवहार और उसके साथ बिताए गए सच्चे पलों से धीरे-धीरे गहराता है.

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सनम, तुम देना साथ मेरा

यह कविता प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प को दर्शाती है। भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों में रची यह रचना स्त्री के समर्पण, स्नेह और भावनात्मक सुरक्षा की आकांक्षा को कोमल शब्दों में व्यक्त करती है।

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