एक छोटी लड़की चूल्हे और किताबों के बीच खड़ी, पढ़ाई और अपने सपनों की ओर बढ़ने की इच्छा दर्शाती हुई।

चूल्हे से किताब तक

खुशबू गोयल माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न।नहीं पकड़नी ये करछी मुझको,ज़रा कलम तो पकड़ाओ न। भैया भी तो पढ़ने जाता है,मुझको भी तो पढ़ाओ न।माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न। मेरे भी तो सपने हैं,करने उनको अपने हैं।मत सुलगाओ चूल्हे की अग्नि में मुझको,विद्यालय…

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एक व्यक्ति दूसरों को सहारा देते हुए पेड़ की छाँव में बैठा, इंसानियत और सहानुभूति का प्रतीक दृश्य।

रिश्तों की सच्चाई

यह कविता जीवन की भागदौड़ में खोती इंसानियत को जगाने का प्रयास है। इसमें रिश्तों की सच्चाई, अहंकार से परे जाकर दूसरों को समझने और साथ देने का गहरा संदेश छिपा है।

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एक भावनात्मक दृश्य जिसमें एक व्यक्ति पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा है, पतझड़ के पत्ते गिर रहे हैं और आसपास बदलते मौसम के साथ प्रकृति में आशा और स्मृतियों का प्रतीकात्मक चित्रण है

मौसम लौटता है ज़रूर

“मौसम लौटता है ज़रूर” एक संवेदनशील कविता है जिसमें ऋतुओं के माध्यम से प्रेम, बिछड़न और उम्मीद को बेहद खूबसूरती से व्यक्त किया गया है। यह कविता जीवन के चक्र और भावनाओं की गहराई को छूती है।

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अंधेरी गली में भूखा बच्चा, पृष्ठभूमि में झगड़ा और सामने जलता हुआ दीया, जो उम्मीद का प्रतीक है.

चीखती इंसानियत

यह कविता इंसानियत के दर्द, टूटते रिश्तों और बढ़ती नफरत की सच्चाई को उजागर करती है, लेकिन साथ ही करुणा, प्रेम और संवेदना के जरिए बदलाव की उम्मीद भी जगाती है.

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आत्मविश्वास से भरी महिला, आईने के सामने खड़ी, अपनी पहचान और सच्चाई को दर्शाती हुई

कविता हूँ मैं

कविता हूँ मैं’ एक सशक्त और बेबाक रचना है, जो स्त्री के आत्मसम्मान, पहचान और सच को उजागर करती है। यह कविता समाज की संकीर्ण सोच पर तीखा प्रहार करते हुए खुद को आईने की तरह प्रस्तुत करती है, जो सच्चाई को ज्यों का त्यों दिखाती है।

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वृंदावन में संध्या समय बांसुरी बजाते कृष्ण और लज्जा से झुकी नजरों के साथ खड़ी राधा का दिव्य दृश्य

लज्जा

‘लज्जा’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, सौंदर्य और भावनात्मक गहराई को बेहद सुंदरता से प्रस्तुत करती है। इसमें लज्जा, भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम है, जो पाठक को वृंदावन की मनमोहक और आध्यात्मिक दुनिया में ले जाता है।

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थका हुआ व्यक्ति शांत वातावरण में बैठा, सामने हल्की रोशनी के साथ सुकून और ठहराव का प्रतीकात्मक दृश्य

मौत का आलिंगन

यह कविता जीवन के संघर्ष, थकान और मृत्यु के सुकून भरे आलिंगन को गहराई से प्रस्तुत करती है। इसमें दर्द, जिम्मेदारियां और अंततः मिलने वाली शांति का ऐसा चित्रण है, जो पाठक को सोचने और आत्ममंथन करने पर मजबूर कर देता है।

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रात के शांत माहौल में खिड़की के पास बैठी लड़की, खामोश मोहब्बत और अनकहे प्यार के भावों में डूबी हुई

खामोश मोहब्बत

कुछ प्यार ऐसे होते हैं जो कभी शब्दों में नहीं ढलते, फिर भी सबसे सच्चे होते हैं। “खामोश मोहब्बत” एक ऐसी ही अनकही भावनाओं की कविता है, जो दिल को छू जाती है।

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कीचड़ में खिला कमल का फूल, जो संघर्ष और पवित्र प्रेम का प्रतीक है

कीचड़ का कमल

कीचड़ का कमल” प्रेम और जिम्मेदारियों के बीच फँसी एक स्त्री के अंतर्द्वंद्व को बखूबी उकेरती है। यह कविता बताती है कि हर प्रेम कहानी मुकम्मल नहीं होती कभी परिस्थितियाँ, कभी परिवार और कभी सच का सामना रिश्तों को बदल देता है। यहाँ प्रेम पवित्र है, लेकिन आत्मसम्मान और परिवार की गरिमा उससे भी बड़ा सत्य बनकर उभरते हैं।

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