शायद माँ आयी है
‘शायद माँ आई है’ एक ऐसी भावनात्मक कविता है जिसमें माँ सीधे दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी आदतें, सहेजने का ढंग और प्रेम घर के हर कोने में महसूस होता है। यह कविता मातृत्व की उस अनकही उपस्थिति को शब्द देती है जो हमेशा साथ रहती है।

‘शायद माँ आई है’ एक ऐसी भावनात्मक कविता है जिसमें माँ सीधे दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी आदतें, सहेजने का ढंग और प्रेम घर के हर कोने में महसूस होता है। यह कविता मातृत्व की उस अनकही उपस्थिति को शब्द देती है जो हमेशा साथ रहती है।
यह कविता उस स्त्री की आवाज़ है जो समाज की परिभाषाओं से परे अपनी पहचान खुद गढ़ना चाहती है। संघर्ष, आत्मविश्वास और स्वाभिमान से भरी यह रचना स्त्री-अस्तित्व की सशक्त अभिव्यक्ति है।
दूसरों के बनाए रास्तों पर चलने के बजाय अपनी मंज़िल खुद तलाशने का संदेश देती यह प्रेरक हिंदी कविता आत्मविश्वास, संघर्ष और हौसले की ताकत को खूबसूरती से व्यक्त करती है।
प्रेम, दूरी और अधूरे जज़्बातों से सजी यह हिंदी कविता रिश्तों की खामोशियों, तड़प और अनकही बातों का भावपूर्ण चित्रण करती है।