खामोश मोहब्बत

रात के शांत माहौल में खिड़की के पास बैठी लड़की, खामोश मोहब्बत और अनकहे प्यार के भावों में डूबी हुई

नीमा शाह , अहमदाबाद

सुनो…
कभी-कभी दिल चाहता है
कि तुम्हें सब कुछ बता दूँ
कि मेरी हर खामोशी के पीछे
सिर्फ तुम्हारा ही नाम छुपा है।

पर फिर एक डर सा लगता है
कहीं ये एहसास कह देने से
इसकी मासूमियत ही न खो जाए।

तुम्हें शायद खबर भी नहीं,
पर मेरी हर दुआ की शुरुआत भी तुमसे है,
और मेरी रातों की आख़िरी सोच भी तुम ही हो।

मैंने कभी इज़हार नहीं किया,
पर सच तो ये है
मेरी रूह ने तुम्हें
खामोशी से अपना मान लिया है।

अजीब सी मोहब्बत है ये…
तुम अब भी अनजान हो,
और मैं तुम्हारे एहसास में
हर रोज़ थोड़ा और डूबती जा रही हूँ…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *