एक छोटी लड़की चूल्हे और किताबों के बीच खड़ी, पढ़ाई और अपने सपनों की ओर बढ़ने की इच्छा दर्शाती हुई।

चूल्हे से किताब तक

खुशबू गोयल माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न।नहीं पकड़नी ये करछी मुझको,ज़रा कलम तो पकड़ाओ न। भैया भी तो पढ़ने जाता है,मुझको भी तो पढ़ाओ न।माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न। मेरे भी तो सपने हैं,करने उनको अपने हैं।मत सुलगाओ चूल्हे की अग्नि में मुझको,विद्यालय…

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एक व्यक्ति दूसरों को सहारा देते हुए पेड़ की छाँव में बैठा, इंसानियत और सहानुभूति का प्रतीक दृश्य।

रिश्तों की सच्चाई

यह कविता जीवन की भागदौड़ में खोती इंसानियत को जगाने का प्रयास है। इसमें रिश्तों की सच्चाई, अहंकार से परे जाकर दूसरों को समझने और साथ देने का गहरा संदेश छिपा है।

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रात के शांत माहौल में खिड़की के पास बैठी लड़की, खामोश मोहब्बत और अनकहे प्यार के भावों में डूबी हुई

खामोश मोहब्बत

कुछ प्यार ऐसे होते हैं जो कभी शब्दों में नहीं ढलते, फिर भी सबसे सच्चे होते हैं। “खामोश मोहब्बत” एक ऐसी ही अनकही भावनाओं की कविता है, जो दिल को छू जाती है।

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अकेला व्यक्ति उदास बैठा हुआ, दिल टूटने और तन्हाई के भाव को दर्शाता हुआ

क्या कहें हम

यह ग़ज़ल टूटे दिल, अधूरी उम्मीदों और बेवफाई के गहरे दर्द को बयां करती है। हर शेर उस पीड़ा को छूता है, जहाँ अपना ही इंसान अजनबी बन जाता है। यह रचना उन अनकहे जज़्बातों की आवाज़ है, जिन्हें शब्दों में कहना आसान नहीं होता।

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A loving Indian couple sharing simple moments like morning tea, emotional bonding and respect, symbolizing true love and care

खुशनसीब प्रेमिकाएँ…

खुशनसीब प्रेमिकाएँ वो होती हैं जिनके प्रेम में बड़े वादे नहीं, बल्कि छोटी-छोटी सच्ची खुशियाँ होती हैंसुबह की चाय, सम्मान, साथ और एक सुकून भरा रिश्ता। यह कविता सच्चे प्रेम की उसी खूबसूरत सादगी को दर्शाती है।

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