बेवजह

मानव चेहरे के पीछे छिपे दानव रूप को दर्शाता एक व्यक्ति, झूठ और सच्चाई के द्वंद्व को दिखाता दृश्य।

डॉ० संजुला सिंह ” संजू” जमशेदपुर (झारखंड )

बेवजह झूठ तुम बोल रहे,
अपनी करतूतें ढाँक कर,
चुगली-निंदा में समय बिताते,
खुद को बेहतर आँक कर।

धरा पर रह तुम आसमान के
चाँद और तारे नाप रहे,
जले पड़े हो खुद के भीतर,
औरों का जीवन झाँक रहे।

अपनी कमियाँ ढाँकने खातिर
औरों में नुक़्स तुम बता रहे,
दूजे का सुख सहन न होता,
झूठ बोल तुम सता रहे।

खुद के भीतर झूठ भरा है,
सच्चाई को दबा रहे,
पहना चोला मानव का, पर
दानव-सा व्यवहार कर रहे।

झूठ है खाना, झूठ ही पीना,
झूठों के संग रहते हो,
हज़म न होती सत्य कभी भी,
सच्चों को झूठा कहते हो।

अभी भी ज़्यादा कुछ न बिगड़ा,
धरो कदम तुम सच की राह,
देर बहुत हो जाएगी फिर,
लगेगी तुमको दिल की आह।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *