हिंदी कविता
यादों का सफर
यह कविता सच्ची दोस्ती के उन अनमोल पलों को दर्शाती है, जहाँ बिना किसी रिश्ते के भी दिल गहराई से जुड़ जाते हैं और जीवन को खूबसूरत बना देते हैं।
उड़ने की आशा
“उड़ने की आशा” एक प्रेरणादायक कविता है जो जीवन की कठिनाइयों के बावजूद सपनों को जीवित रखने और फिर से उठ खड़े होने की शक्ति को दर्शाती है।
कुछ भी कहो…
“कुछ भी कहो” एक प्रेरक कविता है जो स्त्री की शक्ति, सहनशीलता, संघर्ष और आत्मविश्वास को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि नारी केवल नाम नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति का स्वरूप है।
देह पर ठहरा मौसम !!
“देह पर ठहरा मौसम!!” एक ऐसी संवेदनशील कविता है जिसमें प्रेम के प्रथम स्पर्श, स्मृतियों की गर्माहट और आत्मा तक उतरती अनुभूतियों को बेहद कलात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है।
रोटी दो जून की
अर्पणा सिंह “अर्पी” , रांची बड़ी मुश्किलों से मिल पाती है निजात,मज़दूरों को पाने में रोटी दो जून की सौगात। बैशाख की दोपहरी की धूप या बहती लू,पसीने से लथपथ हो या हो तपती भू।तन ढकने को वसन और मिटाने को भूख,इसी की आपूर्ति में रहते हैं हर पल मशगूल। बड़ी मुश्किलों से मिल पाती…
हाँ, मैं श्रमिक हूँ
“हाँ मैं श्रमिक हूँ” एक प्रेरक और संवेदनशील हिंदी कविता है, जो मजदूर वर्ग के संघर्ष, परिश्रम और त्याग को उजागर करती है। कविता बताती है कि श्रमिक अपने परिवार से दूर रहकर कठिन मेहनत करता है, लेकिन फिर भी अपने काम में गर्व महसूस करता है। छुट्टियाँ, आराम और उत्सव उसके जीवन में कम होते हैं, फिर भी वह समाज की रफ्तार चलाता है। यह कविता मेहनतकश लोगों के जीवन की सच्चाई को सरल शब्दों में सामने लाती है और श्रमिकों के प्रति सम्मान जगाती है।
