हिंदी कविता
“आसान हो जाए सफ़र”
मेरी क़िस्मत में तेरा साथ अगर हो जाएज़िंदग़ी का मेरा आसान सफ़र हो जाएऔर कुछ भी नहीं ख़्वाहिश मेरी अब इसके सिवामेरे महबूब की बस मुझ पे नज़र हो जाए.
…अगर ज़िंदगी फिर से मुड़ जाए
इस कविता में एक स्त्री अपने जीवन के उस मोड़ पर खड़ी होकर गुज़रे समय को फिर से जीने की ख्वाहिश करती है — वो अधूरे सपने, वो रिश्ते, वो बचपन की अलमारी, और माँ की बातें… सब कुछ एक बार फिर सहेजने की उम्मीद लिए। यह एक आत्ममंथन है, एक नई शुरुआत की ओर बढ़ने का भावुक आह्वान।”
