
निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी,जमशेदपुर (झारखंड)
बुद्ध का पुनर्जन्म हुआ जाने कितनी बार,
परित्यक्त यशोधरा कई घरों में,
राहुल का बचपन संवारती मिल जाएंगी।
जाने क्यों, गृह त्यागने वाला पुरुष,
बुद्ध कहलाया और स्त्री कुलटा,
बुद्ध तुम्हें यह संन्यास क्यों आया
विवाह और पुत्रोत्पति के पश्चात!
शायद दिखाना था जीवन का
यह कठिन गृहत्याग और
आजीवन बन जाना पूजा का पात्र…!
परन्तु, स्त्री जननी है जो
संभालती है हर हाल में घर बार,
गृहस्थ जीवन में कैसे आए भला संन्यास?
वचन के वशीभूत दृढ़ संकल्पित
नहीं कर पाई किसी क्षण बहिष्कार,
सारे गरल पीकर भी हो गई आत्मसात
हे बुद्ध, भले ही संसार में तुम हो पूजित,
परन्तु, एक स्त्री के समक्ष हुई है हार,
तुम्हारे जेहन में एक पल को भी
नहीं आया कि है तुम्हारा कोई परिवार…!
बुद्ध, तुम लौट भी आओ तो
होगा नहीं तिरस्कार क्योंकि,
समाज में स्त्री होती इसकी हकदार,
तुम तो बुद्ध हो शराफत के दावेदार…!
लेखिका के बारे में-
डॉ. निवेदिता श्रीवास्तव “गार्गी”
समकालीन हिंदी साहित्य जगत की एक सशक्त, संवेदनशील और बहुआयामी रचनाकार हैं, जिनकी लेखनी में विचारों की प्रखरता, भावनाओं की गहराई और भारतीय संस्कृति की आत्मा स्पंदित होती है। 7 फरवरी को बिहार के सांस्कृतिक नगर छपरा (सारण) में जन्मी डॉ. गार्गी ने शिक्षा, साहित्य और कला—तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। इतिहास विषय में विशेष योग्यता प्राप्त करने के साथ-साथ कत्थक नृत्य में डिप्लोमा तथा शास्त्रीय संगीत का ज्ञान उनके व्यक्तित्व को विशिष्ट गरिमा प्रदान करता है। हिंदी और भोजपुरी दोनों भाषाओं में समान अधिकार से लेखन करने वाली डॉ. गार्गी पद्य, गद्य, ग़ज़ल, गीत, आलेख, कहानी तथा विविध छंद विधाओं में सृजनरत हैं। उनकी रचनाओं में नारी चेतना, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएँ और जीवन दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। सहज भाषा, गहन अनुभूति और प्रभावशाली अभिव्यक्ति उनकी लेखनी की विशेष पहचान है।
वे वर्तमान में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की उपाध्यक्ष तथा ‘कलम की सुगंध’ संस्था की उपाध्यक्ष के रूप में साहित्यिक गतिविधियों का सफल संचालन कर रही हैं। अब तक उनकी एकल पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है तथा 35 साझा संकलनों में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होकर पाठकों का स्नेह अर्जित कर चुकी हैं।डॉ. गार्गी को साहित्य साधना के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया है, जिनमें महामहिम राज्यपाल के करकमलों से प्राप्त अंबालिका देवी साहित्य सारस्वत साधना सम्मान, विद्या वाचस्पति सम्मान, सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान सहित अनेक सम्मान विशेष उल्लेखनीय हैं। उनकी रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी जमशेदपुर से भी हो चुका है।
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