Traditional Indian family scene showing elders blessing children, a cow in the courtyard, books and scriptures on wooden shelves, colorful decorations, and family members in traditional attire performing cultural rituals, representing the richness of Indian culture and heritage.

भारतीय संस्कृति और सभ्यता का बढ़ता संहार

यह लेख भारत की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता की महत्ता को उजागर करता है और आधुनिक युग में इसके ह्रास और सामाजिक बदलावों का चिंतन प्रस्तुत करता है। पारंपरिक रीति-रिवाजों, आदर्श जीवन शैली और सांस्कृतिक मूल्यों की तुलना आज के बदलते समय से की गई है।

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यह लेख पुराने जमाने की रेलवे टिकटिंग, हॉफ टिकट और टिकट कलेक्शन के अनुभवों को यादगार अंदाज में पेश करता है। यात्रा और रेलवे से जुड़ी यादें, nostalgically बयान की गई हैं।

हॉफ टिकट : यादों का स़फर

यह लेख पुराने जमाने की रेलवे टिकटिंग और हॉफ टिकट के अनुभवों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। कैसे कार्डबोर्ड टिकट, तेज आवाज़ वाली मशीन और टिकट कलेक्शन का खेल यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की यादों में आज भी खास जगह रखता है, इसे विस्तार से बताया गया है।

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सच्चा साथी, सच्चा प्रेम

यह भावपूर्ण हिंदी कविता प्रेम, स्नेह और जीवनसाथी के साथ जुड़े भावनात्मक अनुभव को उजागर करती है। इसमें प्यार की गहराई, भरोसा और साथी के साथ जीवन भर निभाए गए रिश्ते की मिठास को सरल और असरदार भाषा में व्यक्त किया गया है।

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नारी देह, प्रकृति और समाज की दोहरी नैतिकता

यह सशक्त वैचारिक निबंध नारी, देह और समाज की दोहरी मानसिकता पर तीखा प्रश्न उठाता है। गाँव और शहर की स्त्रियों के दृष्टिकोण, सेक्स को लेकर समाज की संकीर्णता और प्रकृति के सहज संतुलन को केंद्र में रखते हुए लेख स्त्री-विमर्श को एक गहरे दार्शनिक स्तर पर ले जाता है।

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भागती जिंदगी और खालीपन को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य, जिसमें समय की कमी, धन की दौड़ और सुकून से दूर होता आधुनिक मनुष्य दिखाई देता है

खाली हाथ जाना है…

यह कविता आधुनिक जीवन की भागदौड़, दौलत की अंधी दौड़ और सुकून से दूर होते इंसान की विडंबना को उजागर करती है। “मेरी-मेरी” में उलझे मनुष्य की मानसिकता और खोते मानवीय संबंधों पर यह एक गहरी, आत्ममंथन कराती हुई टिप्पणी है।

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कविता और किताब को प्रेम के प्रतीक के रूप में दर्शाता भावनात्मक दृश्य, जिसमें शब्दों के माध्यम से स्नेह और आत्मीयता का एहसास झलकता है

उपहार में शब्द

यह कविता उपहारों से परे शब्दों के स्नेह को महत्व देती है, जहाँ प्रेम फूलों या वस्तुओं में नहीं, बल्कि लिखी और पढ़ी गई कविताओं तथा किताबों के भावनात्मक स्पर्श में बसता है।

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मुलुंड पश्चिम के प्लेयस मैराथन मैक्सिमा सभागार में आयोजित पोइसी टेल्स समूह की वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में मंच पर काव्य पाठ करते रचनाकार और श्रोताओं से भरा सभागार

शब्दों का उत्सव बना पोइसी टेल्स की बहुभाषी काव्य गोष्ठी

पोइसी टेल्स समूह द्वारा ११ जनवरी २०२६ को मुंबई के मुलुंड पश्चिम में आयोजित वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में देशभर से आए रचनाकारों ने हिंदी, मराठी और अंग्रेजी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। नन्ही कवयित्री राम्या तिवारी की भावपूर्ण प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

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एक भारतीय माँ सुबह के धुंधलके में घर के दरवाज़े पर खड़ी, दूर जाते बेटे को स्नेह और उम्मीद भरी आँखों से देखते हुए.

तुम सपने ज़रूर देखना…

यह कविता सपनों के माध्यम से माँ और संतान के रिश्ते की उस गहराई को छूती है, जहाँ प्रेम स्वार्थ नहीं बल्कि त्याग बन जाता है. महानगर की चकाचौंध के बीच यह रचना याद दिलाती है कि असली ऊर्जा माँ की आँखों में छुपी होती है, और सपनों का सच होना तभी सार्थक है जब उसमें उसकी साँसें बाकी रहें.

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बेटे का इंतजार करती मां की भावुक और प्यार भरी यादें –

बाई, आज तू होती तो…

बाई की वह मुद्रा कभी अचानक नहीं होती थी. पूरा महीना इंतज़ार करने के बाद, जब मैं पुणे से अपने घर लौटता, तो माँ हमारे पहले मकान के पहले कमरे में खिड़की खोलकर बैठी होती थी. कहने को तो वह दूध लेने वाले का इंतज़ार कर रही होती थी, पर असल में उसे मेरा ही इंतज़ार होता था. जैसे ही मैं दरवाज़े से भीतर कदम रखता, वह हल्की-सी मुस्कान के साथ एक ही नज़र में मेरा पूरा एक्स-रे कर लेती.. दुबला तो नहीं हुआ, काला तो नहीं हो गयाए बाल और स़फेद हुए या डाई नहीं की. कुछ भी उससे छुपा नहीं रहता था.

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शत्रुंजय महातीर्थ की 7 यात्रा पूर्ण करने वाले तपस्वी अंकित बोथरा का जैन नवयुवक परिषद द्वारा स्वागत

तपस्वी अंकित बोथरा का किया बहुमान

अखिल भारतीय राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद शाखा महिदपुर रोड द्वारा शत्रुंजय महातीर्थ पालीताणा की 7 यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले तपस्वी अंकित बोथरा का भव्य स्वागत एवं बहुमान किया गया।

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