बदलते मौसम

यह कविता प्रेम में आए भावनात्मक बदलावों और रिश्ते की अनिश्चितताओं को बेहद कोमलता से व्यक्त करती है. प्रिय के बदलते व्यवहार को कवि बदलते मौसम से जोड़ता है. कविता में प्रेम, असुरक्षा, समर्पण और आपसी ज़रूरत की भावना गहराई से उभरती है. अंत में यह विश्वास व्यक्त होता है कि भले ही मौसम बदले, लेकिन सच्चे रिश्ते स्थिर रहते हैं.

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ऊँचाई से बादलों, पहाड़ों और समुद्र को देखते हुए शांत मन का प्रतीक दृश्य, ध्यान और मानसिक शांति को दर्शाता हुआ।

ध्यान : जीवन को ऊँचाई से देखने की कला

ध्यान जीवन को ऊँचाई से देखने की कला है। यह लेख बताता है कि कैसे मन को शांत कर, विचारों से ऊपर उठकर जीवन को सरल और सहज बनाया जा सकता है।

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उस्ताद हमीद खान की याद में पुणे में रिवायत कार्यक्रम

पुणे में 18 जनवरी को चौथा ‘रिवायत’ कार्यक्रम उस्ताद हमीद खान की याद में आयोजित किया जा रहा है। डॉ. बिपुल कुमार राय और अतुल खांडेकर भी इस संगीत संध्या में अपनी कला पेश करेंगे।

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डाकिया मोटरसाइकिल पर सवार होकर एक घर के बाहर ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बुक का लिफाफा सौंपता हुआ, यह दृश्य सरकारी दस्तावेजों की होम डिलिवरी सेवा को दर्शाता है।

पुणे में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बुक होम डिलिवरी महंगी

पुणे में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बुक घर तक मंगवाने की सुविधा अब महंगी हो गई है। परिवहन विभाग ने होम डिलिवरी शुल्क 58 से बढ़ाकर 70 रुपये कर दिया है।

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रिजल्ट से पहले डर का कारोबार

रिजल्ट से पहले मप्र राज्य ओपन स्कूल के छात्रों को पास कराने और अंक बढ़ाने के नाम पर साइबर ठग निशाना बना रहे हैं। बोर्ड ने चेतावनी जारी कर हेल्पलाइन नंबर साझा किया है।

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भारतीय शहर की सड़क पर एक डिलीवरी राइडर हेलमेट पहने मोटरसाइकिल रोककर खड़ा है, चेहरे पर थकान और राहत का भाव, पीछे ट्रैफिक और सिग्नल दिखाई दे रहे हैं, यह दृश्य सुरक्षित डिलीवरी और जिम्मेदार क्विक कॉमर्स का प्रतीक है।

10 मिनट की दौड़ खत्म: क्विक कॉमर्स में सुरक्षा की जीत

‘10 मिनट डिलीवरी’ की दौड़ पर विराम लगना सिर्फ विज्ञापन बदलाव नहीं, बल्कि राइडर्स की सुरक्षा और जिम्मेदार क्विक कॉमर्स की दिशा में एक अहम और संवेदनशील कदम है।

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दूसरों पर टिकी खुशी, भीतर से टूटता मन

जब खुशियाँ दूसरों पर निर्भर हो जाती हैं, तब टूटना तय होता है। यह लेख बाहरी और आंतरिक खुशी के फर्क को समझाते हुए आत्मनिर्भर, स्थिर और सच्ची खुशी की ओर ले जाने वाला भावनात्मक आत्मचिंतन है।

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सर्द सुबह में धुंध से घिरा शहर, हल्की धूप, लोग ऊनी कपड़ों में अलाव के पास बैठे हुए

सूरज ओढ़े रजाई

यह कविता शीत ऋतु के सजीव और मानवीय चित्रण को प्रस्तुत करती है, जहाँ सूरज भी रजाई ओढ़े प्रतीत होता है. ठंडी हवाएँ, पहाड़ों की बर्फ, अलाव की गर्माहट, तिल-गुड़ की सोंधी खुशबू और धूप की कोमल मुस्कान मिलकर सर्द मौसम का एक जीवंत, आत्मीय और सौंदर्यपूर्ण दृश्य रचती हैं.

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टूटे दिल वाली स्त्री खामोशी से अंधेरे कमरे में बैठी हुई, आंखों में दर्द और विश्वासघात का भाव

मेरा संसार

यह कविता एक ऐसे टूटे हुए मन की आवाज़ है, जिसने अपने पूरे संसार को एक ही व्यक्ति में समेट लिया था. भरोसे, प्रेम और समर्पण के बदले उसे झूठ, छल और दर्द मिला. यह रचना विश्वास के टूटने से उपजे आंतरिक संघर्ष, पीड़ा और आत्मबोध को बेहद मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त करती है

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