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अंबुबाची मेला: शक्ति, प्रकृति और आस्था का संगम

अंबुबाची मेला 2026: शक्ति, प्रकृति और नारी सम्मान का अद्भुत उत्सव

जब देवी कामाख्या होती हैं रजस्वला : कामाख्या मंदिर की अनोखी परंपरा

रुचि अग्रवाल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

भारत की सांस्कृतिक विविधता में अनेक ऐसे पर्व और मेले हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं के कारण दुनिया भर का ध्यान आकर्षित करते हैं। असम के गुवाहाटी स्थित पवित्र कामाख्या मंदिर में आयोजित होने वाला अंबुबाची मेला ऐसा ही एक अद्वितीय धार्मिक आयोजन है। यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति, सृजन और प्रकृति के सम्मान का जीवंत उत्सव है। हर वर्ष जून माह में आयोजित होने वाला यह मेला लाखों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

अंबुबाची मेले का संबंध माँ कामाख्या से है, जिन्हें शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में देवी कामाख्या वार्षिक रजस्वला अवस्था से गुजरती हैं। इसी कारण मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं और चौथे दिन विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोल दिए जाते हैं। यह परंपरा स्त्रीत्व और मातृशक्ति के प्रति सम्मान का संदेश देती है।

कामाख्या मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। नीलांचल पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर तांत्रिक साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। अंबुबाची मेले के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से तांत्रिक, अघोरी, नागा साधु और साधक यहाँ एकत्र होते हैं। उनकी उपस्थिति मेले को रहस्य, आध्यात्मिकता और लोक परंपराओं का अनूठा स्वरूप प्रदान करती है।

इस मेले की सबसे खास बात यह है कि यहाँ देवी की किसी प्रतिमा की नहीं, बल्कि सृजन की शक्ति और प्रकृति के चक्र की पूजा की जाती है। ‘अंबुबाची’ शब्द का अर्थ ही है ‘जल का प्रवाह’, जो मानसून, उर्वरता और जीवन के निरंतर प्रवाह का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि यह पर्व केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को भी दर्शाता है।

अंबुबाची मेला असम की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। मेले के दौरान स्थानीय कला, संगीत, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजन पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। श्रद्धा और उत्साह से भरा यह वातावरण आगंतुकों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। हर वर्ष लाखों लोग यहाँ पहुँचकर माँ कामाख्या का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और इस अनूठी परंपरा के साक्षी बनते हैं।

आज के समय में, जब समाज में स्त्री स्वास्थ्य और मासिक धर्म को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, अंबुबाची मेला एक सकारात्मक संदेश देता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सृजन की शक्ति ही जीवन का आधार है और उसका सम्मान करना हमारी संस्कृति की प्राचीन विरासत का हिस्सा रहा है। यही कारण है कि अंबुबाची मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और नारी शक्ति के सम्मान का भव्य उत्सव है।

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