
विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद
ध्यान कहाँ है आपका? कृपया मेरी बात आज ज़रा ध्यान से सुनिए.
ज़मीन पर चलते हुए हम अक्सर कचरा, गंदगी, गड्ढे और अव्यवस्था देखकर परेशान हो जाते हैं. हर कदम पर कोई न कोई बाधा दिखाई देती है. लेकिन जब वही इंसान हवाई जहाज़ में बैठता है, तो दृश्य बदल जाता है. नीचे फैली गंदगी नहीं दिखती, बल्कि ऊपर से सुंदर पहाड़, अथाह समुद्र और स़फेद बादल दिखाई देते हैं. फर्क स़िर्फ एक चीज़ का है..ऊँचाई का.
यही ऊँचाई जीवन में ध्यान देता है. जो व्यक्ति हर वक्त ध्यान में रहता है, उसे छोटी-छोटी परिस्थितियाँ आसानी से विचलित नहीं कर पातीं. क्योंकि उसके भीतर निरंतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह चलता रहता है, जो उसे भीतर से मज़बूत बनाता है. ध्यान करने वाला व्यक्ति समस्याओं को नकारता नहीं, लेकिन उन्हें अपने ऊपर हावी भी नहीं होने देता. आज के समय में तनाव का सबसे बड़ा कारण हैमन में विचारों का निरंतर शोर. विचार रुकते नहीं, दौड़ते रहते हैं, और यही दौड़ मन को थका देती है. ध्यान का अर्थ है इन विचारों को भीतर ले जाना, उन पर मनन करना और फिर मन को शांत कर देना. यही ध्यान है-मन को ना कहना.अपने मन को अपने ही खिलाफ खड़ा न होने देना भी ध्यान का ही एक रूप है. जब हम मन के मालिक बनते हैं, गुलाम नहीं, तब जीवन सहज हो जाता है. लगातार ध्यान करते रहने से हमारे चारों ओर एक सकारात्मक, लगभग दिव्य-सा ऊर्जा मंडल बन जाता है, जो हमें नकारात्मकता से बचाता है. आपने कभी ध्यान दिया है. हम दिन भर इस शब्द का कितनी बार इस्तेमाल करते हैं?
ध्यान से करो. ध्यान रखो. ध्यान से चलो. यहाँ तक किध्यान कहाँ है तुम्हारा? लेकिन विडंबना यह है कि हम शब्द तो बोलते हैं, पर उसके अर्थ पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता. अगर हम इस दुनियादारी के बीच रहते हुए भी ध्यान शब्द के मर्म को समझ लें, तो जीवन जटिल नहीं, बल्कि बेहद सरल और सहज हो जाता है. तब हम नीचे की गंदगी में उलझते नहीं, बल्कि ऊपर से जीवन को देखने लगते हैं. ठीक वैसे ही, जैसे हवाई जहाज़ से धरती को देखते हैं.ध्यान कोई अलग से करने वाली क्रिया नहीं, बल्कि जीवन को देखने की एक ऊँचाई है..और जब ऊँचाई मिल जाती है,तो परेशानियाँ छोटी दिखने लगती हैं.

ध्यान का यथार्थ चित्रण, बहुत ख़ूब 👌👌