ऊँचाई से बादलों, पहाड़ों और समुद्र को देखते हुए शांत मन का प्रतीक दृश्य, ध्यान और मानसिक शांति को दर्शाता हुआ।

ध्यान : जीवन को ऊँचाई से देखने की कला

ध्यान जीवन को ऊँचाई से देखने की कला है। यह लेख बताता है कि कैसे मन को शांत कर, विचारों से ऊपर उठकर जीवन को सरल और सहज बनाया जा सकता है।

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खामोशी में छुपी एक अलग दुनिया

घर पर रहना पसंद करने वाले लोग दुनिया से कटे हुए नहीं होते, बल्कि वे शांति, भावनात्मक सुरक्षा और आत्म-संतुलन को प्राथमिकता देते हैं. उनका समृद्ध आंतरिक संसार, रचनात्मक सोच और खुद के साथ सहज रहने की क्षमता उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाती है. यह आदत आलस्य नहीं, बल्कि आत्म-देखभाल और संतोष का संकेत है.

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गुड़ वाली चाय और मैं

गुड़ वाली चाय और मैं दोनों थोड़े देसी, थोड़े अनगढ़, पर पूरी तरह ईमानदार। जैसे गुड़ अपने रंग को धीरे-धीरे पानी में खोलता है, वैसे ही मेरी मिठास भी समय लेकर सामने आती है। सादगी में भी स्वाद छिपा होता है, यही हमें एक-दूसरे से जोड़ता है।

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रेशमी कंबल

मीनाक्षी वर्मा, लेखिका, नई दिल्ली बहुत पुराने वक्त की बात है। सीताराम नाम का एक आदमी झोपड़ी में रहता था और मजदूरी किया करता था। एक बार मजदूरी करते वक्त उसने एक आदमी को रश्मि कम्बल बेचते देखा। कम्बल देखकर उसका उसे खरीदने का मन हुआ, लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे।वह घर आकर भी…

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नीला आसमां

यह कविता एक शांत और भावपूर्ण नीले आसमां के माध्यम से मन की भावनाओं को व्यक्त करती है। मन पर लगे गहरे दाग और संताप, जैसे आसमां का नीला स्वरूप, आँखों के कोरों पर ढलते आँसुओं के साथ मिलकर भावनाओं को उजागर करता है। बिन मौसम की बारिश की तरह मन और आसमां दोनों के धुल जाने से अंततः शांति और स्वच्छता की अनुभूति होती है। यह कविता आंतरिक संताप और उसके समाधान की संवेदनशील यात्रा को दर्शाती है।

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आसरा

पने भीतर के अदृष्ट संसार और भावनाओं की गहराई को व्यक्त करती हैं। यह कविता यादों, अनुभवों और उन कहानियों की प्रतीक है जो हमारे मन में ठहरी रहती हैं—जैसे कवियों की स्मृतियाँ, वर्जीनिया का मौन, मीरा का विस्मय और अजनबी महिलाओं की अधूरी चिट्ठियां। इस अदृश्य संसार के बीच, कवयित्री अपने विचारों को हर रात धीरे-धीरे खो देती हैं, जैसे कोई ज्योत अपने ही प्रकाश से थक गई हो। अंततः, एक प्रिय व्यक्ति की निस्पंद धड़कनों में मिलने वाला आसरा उसे थके हुए मन को सहारा देने और हृदय का भार साझा करने की अनुभूति कराता है।

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जो खुद को नहीं जाना, उसने कुछ नहीं जाना!

विद्या का वास्तविक अर्थ केवल तकनीकी ज्ञान या भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह सबसे पहले स्वयं को जानने, समझने और जीवन के गहरे आध्यात्मिक अर्थ को खोजने की प्रक्रिया है। यदि हम स्वयं को और समस्त प्राणी जगत को एक ईश्वर की रचना मानकर देखें तो जीवन की अधिकांश उलझनें स्वतः समाप्त हो जाती हैं। विद्या वही है जो हमें भीतर से शुद्ध बनाए, आत्मा को जानने का अवसर दे और बाहरी दिखावे के मोह से दूर रखे।

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परदों के रंग से बदलें घर का भाग्य

वास्तु शास्त्र में जैसे दिशाओं का महत्व है, वैसे ही रंगों की भी विशेष भूमिका होती है. हमारे घर की बनावट, साज-सज्जा और रंग संयोजन सिर्फ सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि हमारे जीवन में मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द भी लाते हैं. घर के दरवाजे-खिड़कियों पर लगाए जाने वाले परदों का रंग वास्तु की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. आइए जानें कि किस दिशा और व्यक्ति के लिए कौन सा रंग शुभ माना गया है और क्यों.

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