हिंदी भाषा के सम्मान और राष्ट्रभाषा के गौरव को दर्शाता भारतीय दृश्य

हिंदी का सम्मान करें

हिंदी भाषा के सम्मान और राष्ट्रभाषा के स्वर को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती यह कविता भारत की सांस्कृतिक एकता और भाषाई गौरव का संदेश देती है।

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अनु बारिश में बालकनी से खेलती बच्चों और इंद्रधनुष को देखती

अनु और बारिश की रात

बारिश और बचपन की यादों में खोई अनु की कहानी। इंद्रधनुष, कागज़ के जहाज और नहर किनारे की खेल-खिलवाड़ भरी यादें जीवंत कर देती हैं बचपन की मासूमियत।

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लोहड़ी

“लोहड़ी” लघुकथा में प्रेम, मानवता और त्यौहार का सुंदर संगम है। बहु के प्रेम और समझ से सासू माँ का दिल बदलता है, और पर्व स्नेह का प्रतीक बन जाता है।

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कविताएँ मेरी हथेली पर

यह कविता जीवन की हथेली पर उकेरी गई अनुभूतियों का चित्र है। माँ, पिता, प्रेम और समाज चारों मिलकर मनुष्य के अस्तित्व की रेखाएँ बनाते हैं। कविताएँ यहाँ केवल रचना नहीं, बल्कि पहचान और पूर्णता का प्रतीक हैं।

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शब्दों से सुकून

लिखना केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि आत्मा का संवाद है। लिखिए क्योंकि शब्द सुकून देते हैं, सपनों को पहचान देते हैं और आपको आपकी कहानी का रचनाकार बनाते हैं।

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यमुना तट पर खड़े भगवान कृष्ण और उनके सम्मुख नतमस्तक भक्त का भावपूर्ण दृश्य, जो भक्ति और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है.

कान्हा, मुझे मीरा ही बना लेना

यह कविता कृष्ण-प्रेम की परंपरा में समर्पण, भक्ति और निस्वार्थ प्रेम की एक अंतर्यात्रा है. इसमें राधा और मीरा के प्रतीकों के माध्यम से आत्मा का ईश्वर से संवाद रचा गया है. प्रेम यहाँ भय से परे, सामाजिक रिवाजों से टकराता हुआ भी अडिग रहता है. जब प्रेम का अधिकार न मिले, तब दर्शन, और अंततः स्वयं को बाँसुरी बना देने की चाह यह रचना उसी परम समर्पण की अभिव्यक्ति है.

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सांझ के समय चौराहे पर खड़ा एक व्यक्ति, जीवन के फैसलों और अस्तित्व पर विचार करता हुआ, भावनात्मक और यथार्थवादी दृश्य

एक जिंदगी, हजार सवाल

जिंदगी एक ऐसा अनुभव है जो कभी भ्रम बनकर सामने आती है, तो कभी ख्वाब की तरह आंखों में उतर जाती है. यह हँसी और आँसू के बीच झूलती हुई एक अनकही बेचैनी है, जिसे इंसान जीवन भर सुलझाने की कोशिश करता रहता है. कभी अधूरी रह जाती है, तो कभी मुकम्मल होकर भी सवाल छोड़ जाती है.

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नींद

यह कविता अनिद्रा की उस गहरी अवस्था को चित्रित करती है, जहाँ शरीर थक चुका होता है लेकिन मन लगातार सक्रिय रहता है. रात भर जागती सोच, तकिये के नीचे दबी अनकही बातें और स्थिर घड़ी की सुइयाँ जीवन की थकान और मानसिक बोझ को प्रतीकात्मक रूप में सामने लाती हैं. सुबह होने पर भी रात का जागना भीतर बना रहना, आधुनिक मनुष्य की मानसिक बेचैनी को सशक्त रूप से व्यक्त करता है.

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