
अमरजीत कौर, लेखिका, बरेली
जिंदगी एक भ्रम है.
जिंदगी एक ख़याल है.
जिंदगी एक ख़्वाब है.
जो कभी बीच में टूट जाता है,
तो कभी मुकम्मल भी हो जाता है.
जिंदगी एक पहेली भी है,
जिसे सुलझाते-सुलझाते ताउम्र बीत जाती है.
जिंदगी कभी हँसाती है,
कभी रुलाती है,
एक बेचैनी भी है.

Nice
बहुत बहुत बधाई इस सुंदर अभिव्यक्ति पर।
आशान्वित हूं कि इसी तरह की सुंदर लेखनी आगे भी मिलेगी।
एक बार फिर से बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।