एक जिंदगी, हजार सवाल

सांझ के समय चौराहे पर खड़ा एक व्यक्ति, जीवन के फैसलों और अस्तित्व पर विचार करता हुआ, भावनात्मक और यथार्थवादी दृश्य

अमरजीत कौर, लेखिका, बरेली

जिंदगी एक भ्रम है.
जिंदगी एक ख़याल है.
जिंदगी एक ख़्वाब है.
जो कभी बीच में टूट जाता है,
तो कभी मुकम्मल भी हो जाता है.

जिंदगी एक पहेली भी है,
जिसे सुलझाते-सुलझाते ताउम्र बीत जाती है.

जिंदगी कभी हँसाती है,
कभी रुलाती है,
एक बेचैनी भी है.

2 thoughts on “एक जिंदगी, हजार सवाल

  1. बहुत बहुत बधाई इस सुंदर अभिव्यक्ति पर।
    आशान्वित हूं कि इसी तरह की सुंदर लेखनी आगे भी मिलेगी।
    एक बार फिर से बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।

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