उपहार में शब्द

कविता और किताब को प्रेम के प्रतीक के रूप में दर्शाता भावनात्मक दृश्य, जिसमें शब्दों के माध्यम से स्नेह और आत्मीयता का एहसास झलकता है

सुरभि ताम्रकार, लेखिका, दुर्ग

तुम जब मिलने आओ तो
ना लाना कोई फूल, ना ही कोई गुलदस्ता।
ना ही कोई मेरी पसंदीदा चीज
मेरे उपहार के लिए।

तुम लाना अपनी लिखी कोई कविता मेरे लिए,
और अगर नहीं ला पाए वह कविता-ग्रंथ,
तो लाना अपनी पढ़ी हुई
कोई करीबी किताब मेरे लिए।

क्योंकि मैं हिस्सा होना चाहती हूँ
उस स्नेहिल स्पर्श का,
जिसे पढ़ने के क्रम में
तुमने अपना लिया।

वे शब्द जो तुम्हारे हो गए,
अब…
मुझे तुम्हारी भावनाओं का एहसास कराएँगे
अपनी ही उँगलियों के स्पर्श से
पढ़ते हुए।

मैं भी स्नेहिल होती जाऊँगी
तुम्हारे शब्दों की तरह।

3 thoughts on “उपहार में शब्द

  1. बहुत ही खूबसूरत भावाभिव्यक्ति, शब्दों से प्यार! खूबसूरत रचना 👌👌

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