शब्दों का उत्सव बना पोइसी टेल्स की बहुभाषी काव्य गोष्ठी

मुलुंड पश्चिम के प्लेयस मैराथन मैक्सिमा सभागार में आयोजित पोइसी टेल्स समूह की वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में मंच पर काव्य पाठ करते रचनाकार और श्रोताओं से भरा सभागार

रीमा राय सिंह, प्रसिद्ध लेखिका, मुंबई

जब शब्द सीमाओं से परे जाकर संवेदनाओं से संवाद करते हैं, तब साहित्य केवल अभिव्यक्ति नहीं रहता, वह एक उत्सव बन जाता है। ऐसा ही एक अविस्मरणीय साहित्यिक उत्सव ११ जनवरी २०२६ को पोइसी टेल्स समूह की वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी के रूप में देखने को मिला, जहाँ देश के विभिन्न कोनों से आए रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं के मन और आत्मा को छू लिया।

मुलुंड पश्चिम स्थित प्लेयस मैराथन मैक्सिमा के सभागार में आयोजित इस भव्य आयोजन में मराठी, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं की कविताओं ने साहित्यिक एकता और सांस्कृतिक सौहार्द का सुंदर दृश्य रचा। अनुपमा कडवाड जी द्वारा स्थापित पोइसी टेल्स समूह पिछले पाँच वर्षों से साहित्य को समर्पित होकर रचनात्मक मंच प्रदान करता आ रहा है, और यह आयोजन उसी सतत प्रयास का सशक्त प्रमाण रहा।

लगभग चार घंटे तक चले इस काव्य आयोजन में स्नेहल साठे, शशिप्रिया गुंजल, रंजना जी, मीरा भंसाली, रीमा राय सिंह, शरद लाड, अंकित पारकर, अमित, शीतल राम कुमार, प्रसाद साल्वी, विकास सिंह, कल्पना त्रिपाठी पांडे, रश्मि तिवारी, दीपा राजपूत, कुमारन नादर, प्रज्ञा सुर्वे, डॉ. रश्मि तिवारी, राम्या तिवारी, अनघा कडवाड, प्राचेता घोसालकर सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

कार्यक्रम का सफल संचालन और आयोजन पोइसी टेल्स समूह के एडमिन अजय वर्मा जी, अनुपमा कडवाड जी, रुपाली गोरे लाळे जी, डॉ. सुबूही जाफ़र जी तथा रश्मि पेठे जी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

इस यादगार संध्या का सबसे भावुक और प्रेरक क्षण तब आया, जब नन्ही कवयित्री राम्या तिवारी ने मंच संभाला। अपनी मासूम आवाज़, आत्मविश्वास और गहरी संवेदनाओं से भरी कविता के माध्यम से उसने पूरे सभागार को भावुक कर दिया। उम्र से कहीं बड़ी उसकी प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा की कोई आयु नहीं होती। उपस्थित सभी साहित्यकारों और श्रोताओं ने उसकी कविता की मुक्त कंठ से सराहना की।

कुल मिलाकर, पोइसी टेल्स की यह बहुभाषी काव्य गोष्ठी केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शब्दों, भावनाओं और सांस्कृतिक एकता का एक यादगार साहित्यिक उत्सव बनकर उभरी।

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