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Live Wire News लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित, 3 को प्रथम पुरस्कार

मौसमी चंद्रा, रेनू शब्द मुखर और डॉ. रत्ना माणिक ने जीता प्रथम पुरस्कार

लाइव वॉयर न्यूज लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। मौसमी चंद्रा,रेनू
शब्द मुखर और डॉ. रत्ना माणिक ने प्रथम पुरस्कार हासिल किया, जबकि अन्य रचनाकारों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

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उज्जैन में आयोजित आशापूर्णा तुमि सम्पूर्णा पुस्तक के सात खंडों के लोकार्पण समारोह का दृश्य

आशापूर्णा देवी का साहित्य भारतीय धरोहर : प्रो. शर्मा

बांग्ला लेखिका आशापूर्णा देवी का कथा संसार भारतीय साहित्य की अनुपम उपलब्धि है। हिंदी परिवार द्वारा आयोजित समारोह में डॉ. बूला कार की आलोचना कृति आशापूर्णा तुमि सम्पूर्णा के सात खंडों का लोकार्पण किया गया।

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मुलुंड पश्चिम के प्लेयस मैराथन मैक्सिमा सभागार में आयोजित पोइसी टेल्स समूह की वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में मंच पर काव्य पाठ करते रचनाकार और श्रोताओं से भरा सभागार

शब्दों का उत्सव बना पोइसी टेल्स की बहुभाषी काव्य गोष्ठी

पोइसी टेल्स समूह द्वारा ११ जनवरी २०२६ को मुंबई के मुलुंड पश्चिम में आयोजित वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में देशभर से आए रचनाकारों ने हिंदी, मराठी और अंग्रेजी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। नन्ही कवयित्री राम्या तिवारी की भावपूर्ण प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

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वरिष्ठ बाल साहित्यकार नीलम राकेश होंगी सम्मानित

बाल साहित्य के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय और सशक्त रचनात्मक योगदान देने वाली वरिष्ठ बाल साहित्यकार श्रीमती नीलम राकेश को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित ‘अखिल भारतीय अनुराग साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान अनुराग सेवा संस्थान, लालसोट (राजस्थान) की ओर से प्रदान किया जा रहा है।

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“सृजनिका” के छठे अंक का गरिमामयी लोकार्पण

मुंबई से प्रकाशित त्रैमासिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका सृजनिकाके छठे अंक का लोकार्पण मंगलवार, 26 अगस्त को कुर्ला स्थित यूकेएस इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ एंड रिसर्च के सभागार में हुआ.
समारोह के मुख्य अतिथि हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक (नॉन-फ्यूल बिज़नेस) मुरलीकृष्ण वेंकट वाद्रेवु ने हिंदी को व्यवसाय-वृद्धि की महत्वपूर्ण सहयोगी भाषा बताते हुए अपने अनुभव साझा किए.

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प्रोफेसर अजहर हाशमी नहीं रहे

“हर विषय और हर शख्सियत पर जब वे लिखते हैं, तो पढ़ने वाला पढ़ता ही रह जाता है।”
यह पंक्ति प्रोफेसर हाशमी की अद्भुत लेखनी और ज्ञान की गहराई को दर्शाती है, जिससे पाठक मंत्रमुग्ध हो जाते थे।

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