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आशापूर्णा देवी का साहित्य भारतीय धरोहर : प्रो. शर्मा

उज्जैन में आयोजित आशापूर्णा तुमि सम्पूर्णा पुस्तक के सात खंडों के लोकार्पण समारोह का दृश्य

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

उज्जैन।
बांग्ला की सुविख्यात लेखिका आशापूर्णा देवी का कथा संसार भारतीय साहित्य जगत की अनुपम उपलब्धि है। उनकी रचनाएँ जहाँ एक ओर असहाय नारी की विडंबनाओं को स्वर देती हैं, वहीं समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। आशापूर्णा देवी पर केंद्रित डॉ. बूला कार की आलोचनात्मक कृतियाँ उनके साहित्यिक योगदान का सजीव साक्षात्कार कराती हैं।

ये विचार सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक एवं प्रख्यात समालोचक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने हिंदी परिवार द्वारा आयोजित ‘आशापूर्णा तुमि सम्पूर्णा’ आलोचना कृति के सात खंडों के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।

प्रो. शर्मा ने कहा कि डॉ. बूला कार ने आशापूर्णा देवी के दो सौ से अधिक साहित्यिक कृतियों के विशाल सागर से मोती चुनकर सात खंडों में जिस तरह प्रस्तुत किया है, वह हिंदी साहित्य जगत के लिए एक अनमोल धरोहर है। उन्होंने कहा कि बूला जी आशापूर्णा देवी के साहित्य में इतनी गहराई से डूबी हैं कि उनकी कृतियाँ स्वयं आशापूर्णा की संवेदना से साक्षात्कार कराती हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध कवि एवं समिति के सभापति श्री सत्यनारायण सत्तन (इंदौर) ने कहा कि साहित्य तभी सार्थक होता है जब वह आमजन से जुड़ता है। डॉ. बूला कार की कृतियाँ मूल रचनाओं की आत्मा को समझने और महसूस करने का अवसर प्रदान करती हैं।

समिति के प्रधानमंत्री श्री अरविंद जवलेकर ने कृतियों को अत्यंत मूल्यवान बताते हुए डॉ. बूला कार के लेखन की सराहना की। इस अवसर पर डॉ. बूला कार के हिंदी काव्य संग्रह ‘अंतर्द्वंद्व’ के अंग्रेज़ी अनुवाद पर चर्चा करते हुए डॉ. गरिमा दुबे ने कहा कि कोलकाता की डॉ. निवेदिता बनर्जी द्वारा किया गया अनुवाद भावपूर्ण, प्रवाहपूर्ण और मूल संवेदना के अनुकूल है।

डॉ. बूला कार ने आशापूर्णा देवी के जीवन और साहित्य पर लिखने की अपनी प्रेरणा और शोध प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा वाग्देवी सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मां सरस्वती की वंदना सौम्या मोहंती ने मधुर स्वर में प्रस्तुत की। अतिथियों का परिचय एवं कार्यक्रम संचालन हिंदी परिवार के अध्यक्ष श्री हरेराम बाजपेयी ने किया तथा आभार प्रदर्शन सचिव श्री संतोष मोहंती ने किया।

अतिथियों का स्वागत श्री सदाशिव कौतुक, प्रभु त्रिवेदी, विनीता सिंह चौहान, देवेंद्र सिसोदिया, दामिनी सिंह ठाकुर, डॉ. रमेश चंद्र एवं मुकेश इंदौरी ने किया।

इस अवसर पर डॉ. शशि निगम, डॉ. रागिनी शर्मा, दिनेश दवे, डॉ. कमल हेतावल, तनुजा चौबे, सुरेखा सिसौदिया, शिशिर उपाध्याय (बड़वाह) सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शोधार्थी एवं सुधीजन उपस्थित रहे।

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