सोच

सोच ही हमें भीड़ से अलग करती है। दौलत नहीं, असली संपत्ति हमारी सोच है जो जीना सिखाती है, दोस्त मिलाती है, और इंसान को महान बनाती है।

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स्त्री का मौन बोझ

किसी एक स्त्री ने कभी अपने ऊपर सारी ज़िम्मेदारियाँ लाद ली होंगी प्रेम और सम्मान की आशा में। तभी तो पीढ़ियाँ गुज़र गईं, पर “ना” कहने की हिम्मत आज भी उसके भीतर कहीं दबी रह गई। उसने जो बोझ उठाया, वही बोझ उसने अपनी बेटी को भी सौंप दिया.यह कहकर कि “मैंने किया है, तुम भी करना।”
शायद अगर कभी उसने एक बार कह दिया होत “यह सिर्फ मेरा काम नहीं है, हम मिलकर बाँटेंगे”तो आज घरों में ज़िम्मेदारियाँ बराबर होतीं, और स्त्री सिर्फ कर्तव्य नहीं, अपना अधिकार भी जी रही होती।

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“किताब”

किताबें सचमुच खुशनसीब होती हैं। हर कोई उन्हें खोलकर पढ़ना चाहता है, उनकी गहराइयों तक उतर जाना चाहता है। मगर हम… हम तो अपनी ज़िंदगी यूँ ही किताबों से बातें करते हुए गुज़ार देते हैं। पता नहीं, हमारी अपनी गहराइयों को समझने वाला कौन होगा…और कब आएगा…जो हमें भी किसी किताब की तरह ध्यान से पढ़ सके, और हमारी ख़ामोश निगाहों में छिपे अर्थों को समझ पाए।

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भरत जैन देश का सबसे अमीर भिखारी

मुंबई की सड़कों पर बैठने वाला एक साधारण सा भिखारी, जिसकी रोज की आमदनी ने उसे ७.५ करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक बना दिया. भारत जैन की कहानी सिर्फ चौंकाती नहीं, बल्कि शहरी भारत की अनकही सच्चाइयों का आईना भी दिखाती है. जहां समझदारी, बचत और धैर्य फुटपाथ से लेकर करोड़ों की संपत्ति तक का सफर तय कर देते हैं.

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ढोल थम गया, दिल थम गया

कभी शादियों में ढोल की लय और “नागिन डांस” की धुन पर दिल बेक़ाबू होकर थिरक उठते थे। अब कहीं न ताल बची है, न वो मस्ती। DJ के शोर में मानो रिश्तों की गर्माहट दब गई है। दूल्हा-दुल्हन भी कैमरे की कैद में इतने बंध गए हैं कि लगता है मानो शादी नहीं, कोई बड़ा फोटोशूट चल रहा हो। कभी घरों में उठने वाली खुशी, हँसी-ठिठोली और अपनापन अब बस दिखावे की चमक में धुंधला गया है। वक्त बदल गया है पर शायद मन अब भी उसी खोई हुई सरलता, सादगी और आत्मीयता को खोज रहा है।

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महंगाई

आज की महंगाई ने जीवन को बहुत मुश्किल बना दिया है। हर चीज़ की कीमत बढ़ गई है और आम आदमी का घर चलाना कठिन हो गया है। पहले जो छोटी-सी चीज़ें आसानी से मिल जाती थीं जैसे मोटर या भिंडी . अब उन्हें खरीदना भी मुश्किल हो गया है। तेल न होने पर खाना बनाना भी मुश्किल हो जाता है और परेशानियाँ बढ़ जाती हैं। लोग पूछते हैं तो कुछ कह नहीं पाते, और ना पूछें तो मन में ही दुःख बढ़ता रहता है। महंगाई की मार से जीवन इतना जटिल हो गया है कि इसे अनदेखा करना भी मुश्किल है।

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आलिंगन, निकटता और परमानंद : स्त्री का पूरा अस्तित्व

ओशो के डिस्कोर्स से औरत सेक्स में बहुत अधिक रुचि नहीं रखती। वह गर्माहट, गले लगाने, मित्रता और प्रेम में ज़्यादा रुचि रखती है। पुरुष अधिकतर सेक्स में रुचि रखते हैं। ये गलतफहमियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि शायद भगवान ने दुनिया नहीं बनाई होगी — क्योंकि यहाँ कुछ भी मेल नहीं खाता। ऐसा…

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विश्वभर में मनाया गया इंटरनेशनल मीटलेस डे

साधु वासवानी की 146वीं जयंती पर करुणा और शाकाहारी संदेश का उत्सव पुणे से सुरेश परिहार की रिपोर्ट करुणा, शांति और शाकाहारी जीवनशैली के संदेश को समर्पित इंटरनेशनल मीटलेस डे इस वर्ष भी वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर मनाया गया। गुरुदेव साधु टी. एल. वासवानी की 146वीं जयंती के अवसर पर दुनियाभर में आध्यात्मिक…

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अहाना को धर्मेंद्र की दौलत नहीं, ये विरासत चाहिए

मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की बेटी अहाना देओल ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें पिता की संपत्ति या दौलत में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने पिता की पहली कार, उनकी फिएट, को विरासत में चाहती हैं। उनका कहना था कि इस कार से जुड़े अनगिनत…

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उज्जैन रेलवे स्टेशन का डिजाइन फिर बदला

उज्जैन रेलवे स्टेशन की डिजाइन बदलने के कारण काम एक बार फिर लेट हो गया है। बताया जा रहा है कि अब स्टेशन का नई डिजाइन में निर्माण सिंहस्थ के बाद ही हो सकेगा।15 महीने पहले उज्जैन समेत इंदौर, नागदा, खाचरौद, आलोट और रतलाम मंडल के 11 रेलवे स्टेशनों का पीएम मोदी ने भूमि पूजन किया था। इनमें से उज्जैन को छोडक़र बाकी सभी स्टेशनों पर कार्य शुरू हो चुका है। नागदा स्टेशन का कार्य अंतिम चरण में है।

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