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सिंहस्थ 2028 में बदलेगा ट्रैफिक मॉडल

सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में शहर के बाहर मल्टीलेवल पार्किंग में खड़े वाहन और मेला क्षेत्र की ओर श्रद्धालुओं को ले जाती शटल बसें, व्यवस्थित ट्रैफिक और साइन एज सिस्टम के साथ.

शहर के बाहर बनेगी मल्टीलेवल पार्किंग
30 करोड़ श्रद्धालुओं के मद्देनजर ‘पार्किंग टू पिलग्रिम ट्रांसपोर्ट’ सिस्टम लागू

उज्जैन:
सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन ने इस बार ट्रैफिक प्रबंधन का पूरा खाका बदल दिया है। करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए शहर के बाहर मल्टीलेवल पार्किंग विकसित की जाएगी, जहां से विशेष बसों के जरिए श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा। यह व्यवस्था पहली बार “पार्किंग टू पिलग्रिम ट्रांसपोर्ट” मॉडल के तहत लागू होगी, जिससे शहर के भीतर वाहनों की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

योजना के तहत बाहरी वाहनों को शहर की सीमा से पहले ही निर्धारित पार्किंग स्थलों पर रोका जाएगा। इन पार्किंग स्थलों को लेवल-1, लेवल-2 और लेवल-3 संरचना में विकसित किया जाएगा, ताकि जरूरत के अनुसार क्षमता बढ़ाई या घटाई जा सके। पार्किंग से मेला क्षेत्र, प्रमुख घाटों और प्रवेश द्वारों तक शटल बस सेवा संचालित होगी।

प्रशासन का फोकस इस बार नियंत्रित आवागमन पर है। इसके लिए पार्किंग क्षेत्रों के पास ग्रीनफील्ड सुविधाएं विकसित की जाएंगी, मार्गों पर छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे और पूरे क्षेत्र में साइन एज सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नियंत्रित दरों वाले फूड जोन भी तैयार किए जाएंगे।

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक दबाव को कम करना, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर उपलब्ध कराना और आपातकालीन सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। नियंत्रित बस संचालन के जरिए भीड़ का प्रवाह भी चरणबद्ध तरीके से होगा, जिससे जाम और अव्यवस्था की स्थिति से बचा जा सके।

अपर मुख्य सचिव संजय दुबे पहले ही इस मॉडल को लेकर निर्देश जारी कर चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं सिंहस्थ की तैयारियों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इस बार सिंहस्थ न केवल भव्य और दिव्य होगा, बल्कि ट्रैफिक प्रबंधन के लिहाज से भी अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित अनुभव प्रदान करेगा।

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