मुलुंड पश्चिम के प्लेयस मैराथन मैक्सिमा सभागार में आयोजित पोइसी टेल्स समूह की वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में मंच पर काव्य पाठ करते रचनाकार और श्रोताओं से भरा सभागार

शब्दों का उत्सव बना पोइसी टेल्स की बहुभाषी काव्य गोष्ठी

पोइसी टेल्स समूह द्वारा ११ जनवरी २०२६ को मुंबई के मुलुंड पश्चिम में आयोजित वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में देशभर से आए रचनाकारों ने हिंदी, मराठी और अंग्रेजी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। नन्ही कवयित्री राम्या तिवारी की भावपूर्ण प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

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एक भारतीय माँ सुबह के धुंधलके में घर के दरवाज़े पर खड़ी, दूर जाते बेटे को स्नेह और उम्मीद भरी आँखों से देखते हुए.

तुम सपने ज़रूर देखना…

यह कविता सपनों के माध्यम से माँ और संतान के रिश्ते की उस गहराई को छूती है, जहाँ प्रेम स्वार्थ नहीं बल्कि त्याग बन जाता है. महानगर की चकाचौंध के बीच यह रचना याद दिलाती है कि असली ऊर्जा माँ की आँखों में छुपी होती है, और सपनों का सच होना तभी सार्थक है जब उसमें उसकी साँसें बाकी रहें.

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बेटे का इंतजार करती मां की भावुक और प्यार भरी यादें –

बाई, आज तू होती तो…

बाई की वह मुद्रा कभी अचानक नहीं होती थी. पूरा महीना इंतज़ार करने के बाद, जब मैं पुणे से अपने घर लौटता, तो माँ हमारे पहले मकान के पहले कमरे में खिड़की खोलकर बैठी होती थी. कहने को तो वह दूध लेने वाले का इंतज़ार कर रही होती थी, पर असल में उसे मेरा ही इंतज़ार होता था. जैसे ही मैं दरवाज़े से भीतर कदम रखता, वह हल्की-सी मुस्कान के साथ एक ही नज़र में मेरा पूरा एक्स-रे कर लेती.. दुबला तो नहीं हुआ, काला तो नहीं हो गयाए बाल और स़फेद हुए या डाई नहीं की. कुछ भी उससे छुपा नहीं रहता था.

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शत्रुंजय महातीर्थ की 7 यात्रा पूर्ण करने वाले तपस्वी अंकित बोथरा का जैन नवयुवक परिषद द्वारा स्वागत

तपस्वी अंकित बोथरा का किया बहुमान

अखिल भारतीय राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद शाखा महिदपुर रोड द्वारा शत्रुंजय महातीर्थ पालीताणा की 7 यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले तपस्वी अंकित बोथरा का भव्य स्वागत एवं बहुमान किया गया।

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मोबाइल की लत में डूबा समाज दर्शाती हिंदी कविता “मोबाइल की दुनिया”

मोबाइल की दुनिया

मोबाइल आज ज्ञान, संचार और सुविधा का माध्यम है, लेकिन अंधाधुंध उपयोग ने रिश्तों, बचपन और मूल्यों को संकट में डाल दिया है। चन्द्रवती दीक्षित की यह कविता तकनीक और विवेक के बीच
संतुलन की ज़रूरत को गहराई से उजागर करती है।

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विद्योत्तमा साहित्य सुधाकर सम्मान 2026 से सम्मानित होने वाले ग़ज़लकार डॉ. प्रमोद कुमार कुश तन्हा

डॉ. प्रमोद कुमार कुश को विद्योत्तमा साहित्य सुधाकर सम्मान

सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार डॉ. प्रमोद कुमार कुश ‘तन्हा’ को उनके ग़ज़ल-संग्रह ‘लकीरों का सफ़र’ के लिए 2026 का विद्योत्तमा साहित्य सुधाकर सम्मान नासिक में भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा।

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विश्व हिंदी दिवस समारोह में हैदराबाद में त्रिभाषा अधिवेशन साहित्य सम्मान प्राप्त करतीं मेघा अग्रवाल

हैदराबाद में मेघा अग्रवाल को मिला त्रिभाषा साहित्य सम्मान

विश्व हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर हैदराबाद में आयोजित त्रिभाषा अधिवेशन एवं कवि सम्मेलन में नागपुर की साहित्यकार मेघा अग्रवाल को साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। उनके सशक्त काव्यपाठ को श्रोताओं ने खूब सराहा।

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महिला की गरिमा और मानसिक पीड़ा को दर्शाती सशक्त कविता, जिसमें बिना शारीरिक स्पर्श के की गई हिंसक दृष्टि और नजरों के अपराध को शब्दों के माध्यम से उजागर किया गया है.

देह नहीं, आत्मा का अपमान

यह कविता एक स्त्री के उस अनुभव को गद्यात्मक रूप में सामने रखती है, जहां शारीरिक छेड़छाड़ के बिना भी उसकी गरिमा पर हमला किया जाता है. यह रचना बताती है कि किसी की घूरती, गंदी नजरें भी हिंसा का ही रूप होती हैं, जो मन को भीतर तक घायल कर देती हैं. कविता समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि अपराध केवल स्पर्श से नहीं, बल्कि दृष्टि और मानसिक उत्पीड़न से भी होता है, और ऐसी हर सोच व व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है.

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पाबल में आयोजित प्रवचन सभा के दौरान आचार्य श्री राजरक्षितसूरिजी समाज में सच्चे इंसान के अभाव और पर्यावरण संरक्षण पर विचार रखते हुए

सच्चे इंसान का सबसे बड़ा अकाल

पाबल स्थित श्री पद्मप्रभ स्वामी जिनालय में आयोजित प्रवचन सभा में आचार्य श्री राजरक्षितसूरिजी ने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ा अकाल पानी, अनाज या पेट्रोल का नहीं बल्कि सच्चे इंसान का है, और यदि समय रहते स्वार्थ, भ्रष्टाचार और प्रकृति के विनाश को नहीं रोका गया तो आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा और पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा.

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खंडवा में राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी और डॉ. मुनि श्री शांतिप्रिय सागर जी के तीन दिवसीय विराट सत्संग प्रवचन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित

राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभजी का पावन आगमन

खंडवा में 14 से 16 जनवरी 2026 तक राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी और डॉ. मुनि श्री शांतिप्रिय सागर जी के पावन सान्निध्य में पुरानी अनाज मंडी, रामकृष्ण गंज में तीन दिवसीय विराट सत्संग प्रवचन समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें जीने की कला पर प्रेरणादायी मार्गदर्शन मिलेगा.

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