श्रद्धा और उल्लास से मनाया शासन स्थापना दिवस
महिदपुर रोड में जैन समाज ने वैशाख सुदी ग्यारस पर शासन स्थापना दिवस मनाते हुए श्री सुविधिनाथ जैन मंदिर में शासन ध्वज फहराया और सामूहिक आराधना की।

महिदपुर रोड में जैन समाज ने वैशाख सुदी ग्यारस पर शासन स्थापना दिवस मनाते हुए श्री सुविधिनाथ जैन मंदिर में शासन ध्वज फहराया और सामूहिक आराधना की।
रीता मिश्रा तिवारी हिंदी साहित्य की सशक्त रचनाकार हैं, जिन्होंने कविता, कहानी और लघुकथा के माध्यम से समाज को नई संवेदना और चेतना दी है।
यह कहानी प्रेम, नियति और विश्वास की ऐसी यात्रा है, जहाँ अतीत और वर्तमान टकराते नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझकर स्वीकार कर लेते हैं।
एक संवेदनशील कहानी है जो पति-पत्नी के गहरे प्रेम, बीमारी की पीड़ा और बिछड़ने के मौन भय को हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत करती है।
“बिल्ली का अफसोस” एक रोचक व्यंग्य कविता है जिसमें बिल्ली के माध्यम से बदलते समाज, खत्म होते अंधविश्वास और घटते रुतबे पर मज़ेदार कटाक्ष किया गया है।
“तलवार उठाना होगा” एक ओजपूर्ण हिंदी कविता है जो बेटी, बहन, पत्नी और नारी के विविध रूपों का सम्मान करते हुए समाज में बढ़ते अत्याचारों के विरुद्ध जागरूकता और संघर्ष का संदेश देती है।
यह कविता एक ऐसी स्त्री की आवाज़ है, जिसने रिश्तों के बोझ से ऊपर उठकर खुद को पहचानना सीख लिया है। वह अब समझौते नहीं करती, बल्कि अपने आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के साथ जीना चुनती है।
जब कोई मिलने आए, तो वह अधूरा नहीं, पूरा होकर आए—यही इस कविता का मूल भाव है। यह रचना बताती है कि आधे मन और बंटी हुई भावनाओं के साथ सच्चा समर्पण संभव नहीं होता। प्रेम तभी पूर्ण होता है, जब उसमें किसी प्रकार की कमी या विभाजन न हो।
“तेरे जाने के बाद” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो किसी अपने के बिछड़ने के बाद जीवन में आए बदलावों को दर्शाती है। इसमें जिम्मेदारियों के बीच छिपे दर्द, घर के खाली कोने, यादों की चुप्पी और समय की सच्चाई को बेहद संवेदनशीलता से व्यक्त किया गया है। यह कविता बताती है कि समय घाव भरता नहीं, बल्कि जीना सिखाता है। मुस्कान के पीछे छिपा खालीपन और भीतर की थकान हर उस व्यक्ति की भावना है जिसने किसी खास को खोया है। यह कविता दर्द के साथ जीवन की परिपक्वता भी सिखाती है।
महावीर अभिमन्यु भारतीय इतिहास और महाभारत का ऐसा नाम है, जो अद्भुत साहस और बलिदान का प्रतीक है। अधूरे चक्रव्यूह ज्ञान के बावजूद उन्होंने रणभूमि में अपार वीरता दिखाई। युवा अवस्था में ही अनेक महारथियों का सामना कर उन्होंने इतिहास रच दिया। यह कविता अभिमन्यु के शौर्य, संघर्ष, मातृ स्नेह, अर्जुन पुत्र होने के गौरव और अन्यायपूर्ण मृत्यु की वेदना को व्यक्त करती है। अभिमन्यु केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि साहस, कर्तव्य और आत्मबल का प्रेरणास्रोत हैं, जिनकी गाथा आज भी हर हृदय को प्रेरित करती है।