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सिंदूर से रक्त तक: बदलते रिश्तों पर एक मार्मिक कविता

चरित्र का हनन

प्रेम, विश्वास और रिश्तों की डोर जब छल और स्वार्थ के बोझ तले टूट जाती है, तब केवल दो दिल नहीं बिखरते, बल्कि कई परिवारों की खुशियाँ भी उजड़ जाती हैं। ‘चरित्र का हनन’ कविता आधुनिक समाज में बदलती मानसिकता, विश्वासघात और संवेदनाओं के क्षरण पर एक मार्मिक प्रहार है।

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भारतीय नारी के विभिन्न रूपों—बेटी, पत्नी और माँ—को दर्शाता एक प्रेरणादायक चित्र, जो स्त्री शक्ति, मातृत्व और गरिमा का प्रतीक है।

नारी, तुम नारायणी…

नारी केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, विश्वास और सृजन की अद्भुत शक्ति है। ‘नारी तुम नारायणी हो’ कविता स्त्री के उसी दिव्य स्वरूप को शब्दों में नमन करती है, जो जीवन को संवेदना, शक्ति और अर्थ प्रदान करती है।

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चांदनी रात में खड़े एक भारतीय स्त्री और पुरुष के बीच रौशनी की आध्यात्मिक डोर, जो रूहानी प्रेम और आत्माओं के गहरे जुड़ाव का प्रतीक है।

इश्क सूफियाना

कुछ रिश्ते नाम, दूरी और मुलाकातों के मोहताज नहीं होते। वे दिल से नहीं, रूह से जुड़ते हैं। रूहानी प्रेम एक ऐसा सूफ़ियाना एहसास है, जहाँ दो आत्माएं एक-दूसरे की खुशी, दर्द और खामोशियों को बिना कहे समझने लगती हैं।

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एक हरे-भरे पार्क में भावुक आलिंगन का दृश्य, जहां एक युवा दंपति, एक मां और उसका बेटा तथा दो मित्र एक-दूसरे को गले लगाकर प्रेम, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास कर रहे हैं।

आलिंगन की ताकत

कभी-कभी एक सच्चा आलिंगन वह सब कह देता है, जो हजारों शब्द नहीं कह पाते। गले लगाना केवल प्रेम का इज़हार नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास भी है। जानिए क्यों एक छोटा-सा आलिंगन रिश्तों में बड़ी खुशियां ला सकता है।

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पुनर्मिलन: दो साल बाद पार्क में मिला प्लेन क्रैश में खोया पति

पुनर्मिलन

कभी-कभी प्रेम उम्मीद का दूसरा नाम होता है। प्लेन क्रैश में मृत मान लिया गया राघव, दो साल बाद अपनी पत्नी प्रीति को उसी पार्क में मिलता है, जहां उनके प्यार की शुरुआत हुई थी। यह कहानी बिछड़ने, इंतजार और चमत्कारिक पुनर्मिलन की एक भावनात्मक यात्रा है।

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सांझ के समय फूलों से सजे रास्ते पर अपने प्रिय का इंतजार करता एक प्रेमी, जिसकी आँखों में प्रेम और उम्मीद झलक रही है।

उसने कहा…

“उसने कहा… इधर से गुजरेंगे कभी” और तब से दिल ने इंतज़ार के फूल बिछा दिए। यह शायरी प्रेम, प्रतीक्षा और उन आँखों की कहानी है जिनमें सिर्फ एक ही चेहरा बसता है।

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सूखी नदी, कूड़े के पहाड़ और प्लास्टिक से ढके शहर को देखते हुए एक लेखिका डायरी में लिखती हुई, पर्यावरणीय चिंता और संवेदनशीलता को दर्शाता दृश्य।

मैं लिखूँ

जब प्रकृति घायल हो, नदियाँ सूख जाएँ, शहर प्लास्टिक से ढक जाएँ और चारों ओर पर्यावरणीय संकट दिखाई दे, तब संवेदनशील मन चुप नहीं रह पाता। ‘मैं लिखूँ’ कविता उसी बेचैनी, जिम्मेदारी और परिवर्तन की उम्मीद का सशक्त स्वर है।

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आईने के सामने खड़ी एक भारतीय महिला, जो परिवार की जिम्मेदारियों के बीच स्वयं की पहचान और आत्ममंथन में खोई हुई दिखाई दे रही है।

स्त्री : एक मुलाकात

‘स्त्री – एक मुलाकात’ एक मार्मिक कविता है, जो उस स्त्री की कहानी कहती है जो परिवार, बच्चों और जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते स्वयं से दूर हो जाती है। यह कविता स्त्री के त्याग, उसकी अनदेखी इच्छाओं और अपनी पहचान से पुनः मिलने की आकांक्षा को संवेदनशीलता से व्यक्त करती है।

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नीली जुबान और जामुन

नीली जुबान….!

जामुन की नीली जुबान, बचपन की मासूम खुशियां, आईने के सामने की शरारतें और सेहत से जुड़ी अनमोल बातें यह लेख जामुन के स्वाद, यादों और उसके औषधीय गुणों को बेहद रोचक अंदाज में प्रस्तुत करता है।

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सांझ के समय गुलमोहर के पेड़ के नीचे रखे रजनीगंधा के फूल, प्रेम और रूहानी जुड़ाव का प्रतीक।

गुलमोहर और रजनीगंधा

क्या प्रेम केवल साथ रहने का नाम है, या किसी की खुशबू की तरह मन में हमेशा बने रहने का एहसास? ‘गुलमोहर और रजनीगंधा के नाम’ एक रूहानी और रोमांटिक पत्र है, जो प्रेम को रंगों, खुशबू और आत्मिक जुड़ाव के माध्यम से व्यक्त करता है।

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