
अर्चना ज्ञानी, उज्जैन मध्यप्रदेश
अब नहीं ढोती मैं रिश्तों को,
न झुकती हूँ, न झुकाती हूँ,
सालों-साल संभाला जिनको,
अब सहज ही मैं छोड़ पाती हूँ।।
स्पष्ट हूँ अपने शब्दों से,
व्यक्तित्व से मैं दबंग भी हूँ,
लेकिन थोड़ी कमज़ोर हूँ दिल से,
इसलिए अब मज़बूत भी हूँ।।
दिखावे की इस दुनिया से
कोसों-कोस दूर हूँ मैं,
अपनी तरह से जीती हूँ,
कइयों का दिल भी जीतती हूँ।।
इस नई समझ की दुनिया में, सुनो,
खुद को अलग-सा पाती हूँ,
अंदर-बाहर से एक ही हूँ,
इस समझ से दृढ़ हो जाती हूँ।।
अपने तरीके से जीने का
एक मज़ा ही कुछ और है,
नकल करने वालों को
थोड़ा ओछा-सा पाती हूँ।।
बहुत सहेजा है मैंने,
अब खुद को स्वतंत्र-सा पाती हूँ।।
लेखिका के बारे में-
अर्चना ज्ञानी, उज्जैन (मध्यप्रदेश)
सौंदर्य, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली अर्चना ज्ञानी एक सशक्त और बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। पेशे से प्रोफेशनल ब्यूटीशियन होने के साथ-साथ वे शिक्षा और सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं। बी.ए., एम.ए. तथा शास्त्रीय नृत्य में रुचि रखने वाली अर्चना कला, संवेदनशीलता और ज्ञान का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती हैं। खेल के क्षेत्र में भी उन्होंने हॉकी और खो-खो में विश्वविद्यालय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें राज्यपाल और राष्ट्रपति पुरस्कार सहित वर्ष 2020 का “मोस्ट इंस्पायरिंग वुमन अवॉर्ड” प्राप्त हो चुका है।
समाज सेवा उनके जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। सेवा भारती में महानगर किशोरी विकास पालक के रूप में वे किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए कार्यरत हैं। साथ ही, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज की महिला विंग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं। अर्चना ज्ञानी महिलाओं और युवतियों को हस्तनिर्मित वस्तुओं का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बना रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी उल्लेखनीय है. वर्ष 2015 से वे मिट्टी के गणेश निर्माण की कार्यशालाएं आयोजित कर समाज में जागरूकता फैला रही हैं। उनका जीवन समर्पण, आत्मनिर्भरता और प्रेरणा का प्रतीक है, जो निरंतर समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है।

बोहुत ही शानदार अंतर्मन के विचारो की प्रस्तुति एक बोहुत ही सुंदर सुसज्जित लेख मैं 👌😊