मेरु त्रयोदशी व्रत से मोक्ष पथ की साधना

महिदपुर रोड पर पूज्य साध्वी श्री चारित्रकला जी म.सा. की पावन निश्रा में बरडिया परिवार द्वारा मेरु तेरस तप की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। घी के मेरु के साथ तपस्वी ने नगर में जयघोष करवाए और जैन समाज के लोग धर्मलाभ प्राप्त किए।

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मार्बल फर्श पर फिसलने का खतरा

फैशन नहीं, सेफ्टी चुनें

गलत चप्पल या जूते पहनना मामूली गलती नहीं, बल्कि गंभीर हादसे की वजह बन सकता है। चिकनी फर्श और गलत सोल का कॉम्बिनेशन हड्डी टूटने तक का खतरा बढ़ा देता है। जानिए सही फुटवियर चुनने के जरूरी सेफ्टी टिप्स।

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वास्तु अनुसार घर में पोछा लगाती महिला

पोछा नहीं, ऊर्जा-संस्कार

वास्तु के अनुसार पोछा लगाना केवल सफाई नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा को संतुलित करने का संस्कार है। सही दिशा, सही समय और एक छोटे उपाय से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

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महाकाल महालोक में भगोरिया नृत्य की प्रस्तुति

महाकाल की नगरी में लोक–आस्था का महासंगम

उज्जैन के श्री महाकाल महालोक में चल रहे महाकाल महोत्सव के दूसरे दिन भगोरिया, गोंड और बैगा लोकनृत्यों ने शिव भक्ति को जनजातीय उत्सव में बदल दिया। डमरू की गूंज, लोक-संस्कृति और सुरों ने पूरे महालोक को शिवमय कर दिया।

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हिंदी भाषा के सम्मान और राष्ट्रभाषा के गौरव को दर्शाता भारतीय दृश्य

हिंदी का सम्मान करें

हिंदी भाषा के सम्मान और राष्ट्रभाषा के स्वर को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती यह कविता भारत की सांस्कृतिक एकता और भाषाई गौरव का संदेश देती है।

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अनु बारिश में बालकनी से खेलती बच्चों और इंद्रधनुष को देखती

अनु और बारिश की रात

बारिश और बचपन की यादों में खोई अनु की कहानी। इंद्रधनुष, कागज़ के जहाज और नहर किनारे की खेल-खिलवाड़ भरी यादें जीवंत कर देती हैं बचपन की मासूमियत।

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लोहड़ी

“लोहड़ी” लघुकथा में प्रेम, मानवता और त्यौहार का सुंदर संगम है। बहु के प्रेम और समझ से सासू माँ का दिल बदलता है, और पर्व स्नेह का प्रतीक बन जाता है।

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कविताएँ मेरी हथेली पर

यह कविता जीवन की हथेली पर उकेरी गई अनुभूतियों का चित्र है। माँ, पिता, प्रेम और समाज चारों मिलकर मनुष्य के अस्तित्व की रेखाएँ बनाते हैं। कविताएँ यहाँ केवल रचना नहीं, बल्कि पहचान और पूर्णता का प्रतीक हैं।

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