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गुरुकुल उत्सव 2026 में झलकी संस्कृति और प्रतिभा

मंच पर बच्चों ने बिखेरा कला और संस्कारों का रंग

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

महिदपुर रोड : गुरुकुल मानस एकेडमी में आयोजित “गुरुकुल उत्सव 2026” केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपरा और प्रतिभा का अद्भुत संगम बनकर उभरा. पूरे परिसर में ऐसा माहौल था मानो द्वापर युग की झलक वर्तमान में उतर आई हो.नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के लगभग 350 विद्यार्थियों ने मंच पर अपनी प्रतिभा का ऐसा जादू बिखेरा कि दर्शक एक पल के लिए भी अपनी नजरें नहीं हटा सके. हर प्रस्तुति में आत्मविश्वास, समर्पण और संस्कारों की झलक साफ दिखाई दी.

इस आयोजन की सबसे खास बात रही—भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित थीम. गुजराती गरबा की रंगीन लय, महारास की आध्यात्मिक छटा और द्रौपदी चीर हरण की प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया. कई क्षण ऐसे आए जब तालियों की गड़गड़ाहट पूरे परिसर में गूंज उठी और वातावरण भक्ति रस में डूब गया.

पूज्य श्री सुनीलकृष्ण जी व्यास की पावन उपस्थिति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की. वहीं मुख्य अतिथियों के रूप में भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश धाकड़, विधायक दिनेश जैन बोस, बहादुर सिंह चौहान, संदीप व्यास, महेश जायसवाल, राजेंद्र व्यास, रणछोड़ त्रिवेदी, सरपंच रितु पाटीदार और मंडल अध्यक्ष गुरचरण सिंह चौहान की गरिमामयी मौजूदगी ने आयोजन की शोभा और बढ़ा दी.

कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के संचालक राकेश पंड्या के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने गुरुकुल शिक्षा पद्धति के मूल में निहित संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण की महत्ता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया. इस अवसर पर “आइडियल पेरेंट्स कॉन्टेस्ट” के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिसने अभिभावकों और बच्चों के बीच के मजबूत संबंधों को सराहा. वहीं पूरे वर्ष एक भी अवकाश न लेने वाले विद्यार्थी टीनू मकवाना को विशेष सम्मान देकर अनुशासन का जीवंत उदाहरण बताया गया.

कार्यक्रम में नारायण सिंह चौहान ‘बापू’, राधेश्याम मौर्य, पंकज मंडोवरा, चंद्रशेखर पंड्या, संजय पंड्या और अनिल कांठेड की उपस्थिति रही. साथ ही लता पंड्या और परिधि पोरवाल सहित सभी शिक्षकों ने इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

अंत में आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन इसकी यादें लंबे समय तक सभी के मन में जीवंत रहेंगी. “गुरुकुल उत्सव 2026” ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब शिक्षा में संस्कार और संस्कृति का संगम होता है, तब प्रतिभा अपने सर्वोत्तम रूप में खिलती है.

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