सुबह की सुनहरी रोशनी में खेतों के बीच उगता सूरज और गोद में शिशु लिए माँ की छाया, धैर्य, संयम और आशा का प्रतीक

…बस धीरज का छोर न छूटे

बस धीरज का छोर न छूटे” एक सारगर्भित हिंदी कविता है जो धैर्य, सहनशीलता और अडिग विश्वास को जीवन का सबसे बड़ा बल बताती है। प्रकृति, मातृत्व, इतिहास और भक्ति के उदाहरणों के माध्यम से यह रचना बताती है कि समय चाहे कितना भी कठिन हो, धीरज ही सफलता और शांति की कुंजी है।

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सूरज रे तू बढ़ता चल

सूरज रे तू बढ़ता चल” एक प्रेरणादायक कविता है जो अंधकार, थकान और कठिन परिस्थितियों के बीच निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देती है। सूरज यहाँ केवल एक खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि साहस, उम्मीद और उजाले का प्रतीक बनकर उभरता है।

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एक टूटा हुआ काँच का गिलास और खिड़की के पास उदास मुद्रा में बैठा व्यक्ति, जीवन और रिश्तों के टूटने का प्रतीक

टूटना

यह कविता ‘टूटना’ शब्द के बहाने जीवन की उन सभी चीज़ों को छूती है, जिनका टूटना केवल भौतिक नहीं बल्कि भावनात्मक और अस्तित्वगत पीड़ा भी बन जाता है। पेंसिल की नोक से लेकर रिश्तों और विश्वास तक हर टूटन एक गहरी चुप्पी छोड़ जाती है।

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….बिना पिए ही जब हद से गुजरता है नशा

क्या आपने कभी बिना शराब पिए नशे का अनुभव किया है? यह थकान या कमजोरी नहीं, बल्कि ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम जैसी दुर्लभ बीमारी का संकेत हो सकता है, जिसमें आपके शरीर के भीतर कुछ बैक्टीरिया खुद शराब बनाते हैं।

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महिदपुर रोड श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करती पूज्य साध्वी चारित्र कलाश्री जी महाराज साहब

एकमात्र जिन शासन ही सच्ची राह दिखाता है

महिदपुर रोड स्थित श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में आयोजित धर्मसभा में पूज्य साध्वी चारित्र कलाश्री जी म.सा. ने जिन शासन को जीवन की सच्ची राह बताते हुए भगवान महावीर की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला।

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बीएमसी की हार… क्योंकि मुंबई बदल रही है

बीएमसी चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि यह मुंबई के बदलते मतदाता और राजनीति की नई प्राथमिकताओं का संकेत है। भावनात्मक अपील से आगे बढ़कर अब शहर स्थिर शासन, विकास और स्पष्ट नेतृत्व चाहता है। यही बदलाव ठाकरे युग के अंत और नई राजनीति की शुरुआत को परिभाषित करता है।

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लिखते हुए तुम

यह कविता लिखने की प्रक्रिया के भीतर छिपे प्रेम, एकाग्रता और भावनात्मक जुड़ाव को उकेरती है। प्रिय को लिखते हुए देखना, उसकी उँगलियों, कलम और भावनाओं को महसूस करना यह रचना शब्दों से पहले जन्म लेने वाले एहसासों की कथा है।

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A warm Indian family sitting together inside a cozy home in the evening, soft lighting, calm smiles, and a sense of love, belonging, and emotional comfort reflecting the true meaning of home.

आशियाना

घर केवल चार दीवारों का नाम नहीं, बल्कि रिश्तों, यादों और प्रेम से बना एक ऐसा आशियाना है जहाँ सुकून और अपनापन मिलता है। यह कविता घर के भीतर बसने वाली भावनाओं और रिश्तों की सच्चाई को सरल शब्दों में बयाँ करती है।

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नौकरी

नौकरी सिर्फ़ तन्ख्वाह नहीं, बल्कि अनुशासन, समझौता और जीवन की रफ्तार है। यह कविता कामकाजी जीवन के उन अनकहे सचों को उजागर करती है, जहाँ मुस्कान भी ज़िम्मेदारी बन जाती है और नौकरी जीवन को गति देती है।

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डॉ. राधा मंगेशकर पुणे पर्यटन महोत्सव उद्घाटन समारोह में भाषण देती हुई, आसपास उपस्थित पदाधिकारी और दर्शक

सोलो ट्रैवल और आत्मविश्वास

पुणे में आयोजित तीन दिवसीय छठे पुणे पर्यटन महोत्सव में प्रसिद्ध गायिका और सोलो ट्रैवलर डॉ. राधा मंगेशकर ने उद्घाटन किया. उन्होंने बताया कि यात्रा न केवल मन को आनंद देती है बल्कि आत्मविश्वास और सहनशीलता को भी बढ़ाती है. महोत्सव में महाराष्ट्र और भारत के ऐतिहासिक, धार्मिक और ऑफबीट पर्यटन स्थलों की झलक देखने को मिली. लगभग 70 टूरिस्ट कंपनियों के स्टॉल्स लगे, और युवाओं, परिवारों और यात्रा प्रेमियों को जानकारी दी गई. डॉ. मंगेशकर ने सोलो ट्रैवल के महत्व और व्यक्तिगत विकास में इसके योगदान पर जोर दिया. यह महोत्सव पुणेकरों के लिए निशुल्क खुला है और आने वाले सप्ताहांत तक जारी रहेगा, जिसमें कैलास मानसरोवर यात्रा, जंगल पर्यटन मार्गदर्शन और कॉर्पोरेट ट्रैवल सत्र भी होंगे.

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