विश्व हिंदी दिवस समारोह में हैदराबाद में त्रिभाषा अधिवेशन साहित्य सम्मान प्राप्त करतीं मेघा अग्रवाल

हैदराबाद में मेघा अग्रवाल को मिला त्रिभाषा साहित्य सम्मान

विश्व हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर हैदराबाद में आयोजित त्रिभाषा अधिवेशन एवं कवि सम्मेलन में नागपुर की साहित्यकार मेघा अग्रवाल को साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। उनके सशक्त काव्यपाठ को श्रोताओं ने खूब सराहा।

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महिला की गरिमा और मानसिक पीड़ा को दर्शाती सशक्त कविता, जिसमें बिना शारीरिक स्पर्श के की गई हिंसक दृष्टि और नजरों के अपराध को शब्दों के माध्यम से उजागर किया गया है.

देह नहीं, आत्मा का अपमान

यह कविता एक स्त्री के उस अनुभव को गद्यात्मक रूप में सामने रखती है, जहां शारीरिक छेड़छाड़ के बिना भी उसकी गरिमा पर हमला किया जाता है. यह रचना बताती है कि किसी की घूरती, गंदी नजरें भी हिंसा का ही रूप होती हैं, जो मन को भीतर तक घायल कर देती हैं. कविता समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि अपराध केवल स्पर्श से नहीं, बल्कि दृष्टि और मानसिक उत्पीड़न से भी होता है, और ऐसी हर सोच व व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है.

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पाबल में आयोजित प्रवचन सभा के दौरान आचार्य श्री राजरक्षितसूरिजी समाज में सच्चे इंसान के अभाव और पर्यावरण संरक्षण पर विचार रखते हुए

सच्चे इंसान का सबसे बड़ा अकाल

पाबल स्थित श्री पद्मप्रभ स्वामी जिनालय में आयोजित प्रवचन सभा में आचार्य श्री राजरक्षितसूरिजी ने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ा अकाल पानी, अनाज या पेट्रोल का नहीं बल्कि सच्चे इंसान का है, और यदि समय रहते स्वार्थ, भ्रष्टाचार और प्रकृति के विनाश को नहीं रोका गया तो आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा और पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा.

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खंडवा में राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी और डॉ. मुनि श्री शांतिप्रिय सागर जी के तीन दिवसीय विराट सत्संग प्रवचन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित

राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभजी का पावन आगमन

खंडवा में 14 से 16 जनवरी 2026 तक राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी और डॉ. मुनि श्री शांतिप्रिय सागर जी के पावन सान्निध्य में पुरानी अनाज मंडी, रामकृष्ण गंज में तीन दिवसीय विराट सत्संग प्रवचन समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें जीने की कला पर प्रेरणादायी मार्गदर्शन मिलेगा.

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सौ सुनार की, एक लोहार की !

जब समाज सवाल करता है, तब एक माँ का विश्वास ही बेटी की सबसे बड़ी ताकत बनता है। तानों और वर्जनाओं के बीच पली उम्मीदें जब मुकाम तक पहुँचती हैं, तो हर बंद उँगली अपने आप हट जाती है और सपने इतिहास बन जाते हैं।

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Softly lit close-up of two Indian hands gently reaching toward each other without touching, expressing emotional connection, trust, and respectful intimacy in a calm, warm-toned setting.

स्पर्श : संवेदना का संगीत

कुछ स्पर्श शरीर को नहीं, मन को छूते हैं। वे न वासना जगाते हैं, न भय बस भीतर कहीं भरोसे की लौ जला देते हैं। मर्यादा में बंधे ऐसे स्पर्श रिश्तों को शब्दों से पहले समझा देते हैं और इंसान को इंसान होने का एहसास कराते हैं।

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राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा करते वाहन, मोबाइल फोन में नेटवर्क न होने का संकेत, हाईवे पर चेतावनी बोर्ड, सड़क सुरक्षा और कनेक्टिविटी समस्या दर्शाता दृश्य

नेटवर्क गायब तो खतरा दोगुना

राष्ट्रीय राजमार्गों पर मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है. 424 ब्लैक स्पॉट्स की पहचान के बाद एनएचएआई ने DoT और TRAI से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि इमरजेंसी कॉल, अलर्ट सिस्टम और डिजिटल सहायता को मजबूत किया जा सके.

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ड्रग्स और साइबर अपराध कर सकते हैं भविष्य बर्बाद

ड्रग्स की लत और साइबर अपराध युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं. महाराष्ट्र पुलिस स्थापना दिवस के अवसर पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने छात्रों को नशे, फ्रेशर्स पार्टियों और साइबर अपराध से दूर रहने की सख्त सलाह दी. उन्होंने युवाओं से करियर पर ध्यान देने और किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी पुलिस को देने की अपील की.

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एक जोड़ा चुपचाप शाम के समय एक शांत कमरे में बैठा है, पुरुष अपनी प्रेमिका के पास हाथ रखकर, दोनों के चेहरे पर कोमल भाव, हृदय की धड़कन और नज़दीकी की अनुभूति साफ़ झलक रही है।

चुपचाप, बस तुम्हारे पास

उनके साथ बिताया हर पल कुछ अलग ही होता था। न वो कुछ कहते, न ही जताते, फिर भी उनकी उपस्थिति में सब कुछ पूरा लगता। इंतजार भी मीठा लगता और दिल की धड़कन की रफ़्तार को संभालते हुए, हम बस उनके पहलू में बैठते रहते। शामें इतनी खामोशी से गुजरतीं कि शब्द भी कम पड़ जाते, और हर लम्हा अपने आप में रूह तक पहुँचने वाला एहसास बन जाता। यही वह समय था, जब मौन ही सबसे गहरी बातें कह जाता।

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विरह में डूबी युवती, पायल और कंगन पहने, चाँदनी रात में खिड़की के पास बैठी, आँखों से अश्रुधारा बहती हुई, उदासी और प्रतीक्षा का गहरा भाव।

कैसे आऊँ मैं तुमसे मिलने…

यह रचना और दृश्य विरह के उस क्षण को दर्शाते हैं, जहाँ श्रृंगार, आभूषण और सपने सब धुल चुके हैं, और केवल प्रतीक्षा शेष है। पायल की झंकार और कंगनों की आवाज़ मन की उलझनों का प्रतीक बन जाती है। चाँदनी रात, कोरा काग़ज़ और पहरेदार बनी उदासी सब मिलकर प्रेम की उस पीड़ा को रचते हैं, जहाँ मिलने की चाह सबसे बड़ी व्याकुलता बन जाती है।

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